रबी में 177.72 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य
(सभी तस्वीरें- हलधर)नई दिल्ली। अल-नीनो की आशंका और मानसून में असमान बारिश के बीच केंद्र सरकार ने रबी सीजन 2026-27 के लिए 177.72 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी अभियान 2026 में बताया कि आगामी वर्ष के लिए देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य 373.93 मिलियन टन रखा गया है। इसमें रबी सीजन की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 में देश के लिए 362.60 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था, जबकि किसानों ने 376.56 मिलियन टन उत्पादन किया। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए फसल नियोजन किया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में पानी की कमी और मिट्टी में नमी कम है, वहां किसानों को अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों के बजाय दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
धान के रकबे में गिरावट
चौहान ने बताया कि इस साल मानसूनी बारिश में शुरुआती दौर में 14 प्रतिशत की कमी थी, जो हाल की बारिश के बाद घटकर 12 प्रतिशत रह गई है। खरीफ फसलों के बुवाई क्षेत्र में कुल मिलाकर लगभग एक प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है। धान के क्षेत्र में करीब 16.32 लाख हेक्टेयर की गिरावट आई, जबकि उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी और अरहर जैसी फसलों के रकबे में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि कम बारिश और संभावित मौसम संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने अप्रैल से ही तैयारी शुरू कर दी थी। राज्यों के साथ लगातार संवाद, कृषि वैज्ञानिकों की सलाह और आकस्मिक कृषि योजनाओं के माध्यम से फसलों की बुवाई प्रभावित होने से बचाने के प्रयास किए गए। रबी सीजन में भी जलाशयों में पानी की स्थिति, भूजल स्तर और मिट्टी की नमी के आधार पर कृषि रणनीति तैयार की जाएगी।
सूखे का होगा अध्ययन
मंत्री ने बताया कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में भारी बारिश, बाढ़ या सूखे से करीब 6.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रभावित होने की प्रारंभिक सूचना मिली है। प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है। कर्नाटक और महाराष्ट्र में स्थिति का जायजा लेने के लिए 3 अक्टूबर को केंद्रीय टीमें भेजी जाएंगी।