विदा होते मानसून ने किसानों को रुलाया, खरीफ फसलों को भारी नुकसान 

नई दिल्ली 21-Sep-2026 03:54 PM

विदा होते मानसून ने किसानों को रुलाया, खरीफ फसलों को भारी नुकसान 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। प्रदेश से विदाई लेते मानसून ने कही खुशी, कही गम जैसे हालात पैदा कर दिए है। हवा के तेज झोकों के साथ हुई लगातार बारिश से उदयपुर संभाग में खेतों को पानी से लबालब कर दिया है। इससे मक्का, उड़द, मूंग, सोयाबीन सहित कई खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचा है। हालात यह है कि कटी पड़ी फसलों को खेत से उठाना भी मुश्किल हो गया है। जानकारी के मुताबिक चित्तौडग़ढ़, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर और उदयपुर जिलें में हुई अधिक बारिश से खरीफ फसलों को खासा नुकसान पहुंचा है। गौरतलब है कि इस साल प्रदेश में मानसून की कम बारिश हुई है। लेकिन, फिर भी समय-समय पर हुई बारिश से खरीफ फसलों को जीवनदान मिलता रहा। किसानों के मुताबिक फसल अच्छी स्थिति में थी। लेकिन, पिछले दिनों हुई बारिश से खेतों में खुशियों की जगह खराबा पसारने का काम किया है। क्योंकि, दलहनी फसलों की कटाई शुरू हो चुकी है। वहीं, मक्का और सोयाबीन की फसल में भी दाना बनना शुरू हो गया है। तेज हवा से फसल खेतों में बिछ गई है। ऐसे में दाने के साथ-साथ चारे की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी। उधर, पश्चिमी राजस्थान में बारिश की खींच ने पहले ही बाजरा, ग्वार, मूंग और मोठ जैसी फसलों को कटाई से पहले ही सुखा दिया है।  इससे किसानों के हाथ खाली रहने की संभावना बढ़ गई है।

राह ताक रहे किसान

बारिश के कहर से भारी नुकसान के बाद अब किसान बीमा कम्पनी की राह देख रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस बार फसल से अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। लेकिन, कटाई के समय पर भारी बारिश के चलते कटी हुई फसल चौपट हो गई हंै। हालांकि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अधिकतर किसानों ने फसल बीमा करवा रखा है। लेकिन, कागजी कार्रवाई में पेचीदगी के चलते किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

बाजरें में केटरपिलर

बाजरें की फसल में इन दिनों ईयर हैड़ कैटरपिलर का प्रकोप दर्ज हो रहा है। यह कीट बाजरे के सिट्टों को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। जिससे उत्पादन में कमी आती है। यह कीट बाली में दूधिया अवस्था में दानो को खाकर नुकसान पहुंचाते हैं। यह कीट बाजरे की बाली के अंदर फूल में छुप कर दानो को खाता रहता हैं। इस कीट का सर्वाधिक नुकसान ऊन खेतो में है, जिनमें अभी फूल आ रहा है और दाने दूधिया अवस्था पर हैं ।

ऐसे करें नियंत्रण

कीट नियंत्रण के लिए किसान प्रोफेनोफोस 50 ईसी 2 मिली अथवा क्यूनॉलफोस 50 ईसी 2 मिली अथवा इमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी 5 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर छिडक़ाव करें।

ग्वार में ब्लाइट : नियंत्रण : इस रोग की रोकथाम के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 0.3 प्रतिशत 2 से 2.5 किलोग्राम प्रति हैक्टयर और 18 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन प्रति हैक्टयर के हिसाब से घोल बनाकर छिडक़ाव करें।

हरा तैला, तेलीया, सफेद मक्खी

नियंत्रण : रस चूसने वाले इन कीटों के नियंत्रण के लिए एसीटामाप्रिड 150 ग्राम प्रति हैक्टयर के हिसाब से घोल बनाकर छिडक़ाव करें।

कपास

  • रोग : ब्लैक आर्म (जीवाणु अंगमारी)
  • नियंत्रण : इस रोग के नियंत्रण के लिए 18 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन और 2 किलोग्राम ताम्रयुक्त कवकनाशी प्रति हैक्टयर के हिसाब से घोल बनाकर छिडक़ाव करें।

हरा तैला (जैसिड) और सफेद मक्खी

  • नियंत्रण : इसके लिए एसीफेट 500 ग्राम प्रति हैक्टयर के हिसाब से घोल बनाकर छिडक़ाव करें।

मूंगफली रोग

  • टिक्का रोग:  कार्बेण्डाजिम 50 डब्ल्यूपी 0.05 प्रतिशत अथवा एम 45 को 0.2 प्रतिशत के घोल का छिडक़ाव करें।
  • दीमक - खड़ी फसल में 4 लीटर क्लोरपायरीफॉस 20 ईसी प्रति हैक्टयर की दर से पानी के साथ देवें।
  • सफेद लट : लट नियंत्रण के लिए किसान क्लोरपायरीफॉस 4 लीटर प्रति हैक्टयर के हिसाब से छिडक़ाव करें।

तिल

  • गॉल मक्खी की लट: इस कीट के कारण फलियां फूलकर गांठ का रूप धारण कर लेती है, इसके नियंत्रण के लिए क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण 25 किलोग्राम प्रति हैक्टयर की दर से भुरकाव करें।
  • झुलसा रोग:- झुलसा रोग नियंत्रण के लिए किसान मैन्कोजेब डेढ़ किलोग्राम प्रति हैक्टयर की दर से उपयोग करें।

मूंग, मोठ, उड़द

  • हरा तेला (जैसिड), एफिड थ्रिप्स और सफेद मक्खी।
  • नियंत्रण : इन रोगों के नियंत्रण के लिए एसीटामाप्रिड 150 ग्राम प्रति हैक्टयर के हिसाब से छिडक़ाव करें।


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