संपर्क 181 पर लंबित मामलों पर अफसरों को सख्त निर्देश
(सभी तस्वीरें- हलधर)किसानों की शिकायतों के निस्तारण में देरी पर कृषि विभाग ने अब निगरानी और सख्त करने की कवायद शुरू कर दी है। प्रमुख शासन सचिव कृषि मंजू राजपाल ने राजस्थान संपर्क हेल्पलाइन-181 केंद्र का औचक निरीक्षण कर लंबित परिवादों की जमीनी स्थिति परखी। उन्होंने न केवल पोर्टल पर शिकायतों की प्रगति देखी, बल्कि कई परिवादियों से सीधे फोन पर बात कर यह भी जाना कि विभागीय कार्रवाई से उन्हें वास्तविक राहत मिली या नहीं। निरीक्षण के दौरान लंबित शिकायतों के निस्तारण में देरी को लेकर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए। राजपाल ने कहा कि शिकायतों को केवल पोर्टल पर निस्तारित दिखाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका वास्तविक और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने लंबित मामलों की नियमित मॉनिटरिंग और समयबद्ध निस्तारण पर विशेष जोर दिया।
मांग और फंड के मामलों की अलग निगरानी
प्रमुख शासन सचिव ने निर्देश दिए कि राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दर्ज मांग एवं फंड से संबंधित प्रकरणों को अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाए। इससे लंबित शिकायतों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और अधिकारियों के लिए प्राथमिकता के आधार पर मामलों का निस्तारण करना आसान होगा। उन्होंने लंबित प्रकरणों की संख्या में प्रभावी कमी लाने के लिए लगातार मॉनिटरिंग के निर्देश दिए।
किसान बोले—अनुदान और बीमा क्लेम में अटकी राहत निरीक्षण के दौरान सामने आए मामलों में किसानों की सबसे बड़ी परेशानी अनुदान राशि और बीमा क्लेम के भुगतान में देरी से जुड़ी रही। जोधपुर जिले के सुरेश एवं विजय की तारबंदी योजना के तहत लंबित अनुदान राशि की शिकायत पर राजपाल ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
इसी तरह टोंक के शंकरलाल और श्रीगंगानगर के सुखपाल के लंबित फसल बीमा क्लेम की जानकारी ली गई। कुचामन-डीडवाना जिले के बालूराम के सेड-नेट हाउस मरम्मत से जुड़े लंबित बीमा क्लेम तथा कोटा के विक्रम के पाइपलाइन (फव्वारा संयंत्र) की अनुदान राशि के भुगतान का मामला भी सामने आया। झुंझुनू के महीलाल की सोलर पंप की खराब मोटर एवं पंप संबंधी समस्या, रामधन सिंह के फव्वारा संयंत्र अनुदान भुगतान और करौली के राम कुमार के कुट्टी यंत्र पर अनुदान राशि के भुगतान में देरी से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई। प्रमुख शासन सचिव ने संबंधित अधिकारियों को इन सभी मामलों का नियमानुसार त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
पोर्टल पर निस्तारण नहीं, किसान को मिले राहत
राजपाल ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि परिवादों के निस्तारण में आ रही बाधाओं की पहचान कर उनका समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि विभाग की प्राथमिकता केवल लंबित शिकायतों का आंकड़ा घटाना नहीं, बल्कि आमजन और किसानों को कृषि योजनाओं का लाभ समय पर दिलाना है।