फर्जी कृषि कॉलेजों पर लगेगी लगाम, जल्द बनेगी एग्रीकल्चर काउंसिल

नई दिल्ली 14-Oct-2026 04:38 PM

फर्जी कृषि कॉलेजों पर लगेगी लगाम, जल्द बनेगी एग्रीकल्चर काउंसिल

(सभी तस्वीरें- हलधर)

नई दिल्ली। देश में मानकों को दरकिनार कर संचालित हो रहे निजी कृषि कॉलेजों और फर्जी डिग्री के कारोबार पर अब लगाम कसने की तैयारी है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि शिक्षा के नियमन के लिए जल्द एग्रीकल्चर काउंसिल का गठन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल फीस लेकर डिग्री बांटने वाले संस्थानों को किसी भी सूरत में मनमानी की अनुमति नहीं दी जाएगी।

शिवराज सिंह चौहान  पूसा, दिल्ली में एग्रीविज़न के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि कृषि छात्रों की बीएससी (एजी) और एमएससी (एजी) जैसी तकनीकी डिग्रियां बेकार न जाएं और उनकी गुणवत्ता एवं मान्यता कायम रहे। कृषि शिक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म रोडमैप पर काम करेगी।

आप मंथन से अमृत निकालें 

केंद्रीय मंत्री ने कृषि क्षेत्र की नीतियों में छात्रों, शोधार्थियों और किसान संगठनों की भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एग्रीविज़न के राष्ट्रीय अधिवेशन में गहन मंथन कर ऐसे सुझाव सामने लाए जाएं, जिन्हें देशहित में नीतियों का आधार बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि अधिवेशन के निष्कर्षों पर अगले 15 दिन से एक महीने के भीतर प्रतिनिधियों के साथ दोबारा बैठक कर शॉर्ट और लॉन्ग टर्म कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

10 साल में 49 फीसदी बढ़ा खाद्यान्न उत्पादन

चौहान ने कहा कि भारत ने कृषि क्षेत्र में लंबा सफर तय किया है। कभी देश को पीएल-480 के तहत दूसरे देशों से अनाज मंगाना पड़ता था, लेकिन आज भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर है। उन्होंने बताया कि 2014 से 2024 के बीच देश का कुल कृषि उत्पादन 49 प्रतिशत बढ़ा है। भारत चावल के उत्पादन और निर्यात में दुनिया में पहले स्थान पर है, जबकि गेहूं उत्पादन में दूसरे स्थान पर है।

उन्होंने कहा कि अब चुनौती केवल उत्पादन बढ़ाने की नहीं, बल्कि वैज्ञानिक भंडारण, बेहतर प्रबंधन और कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की है। भारत आने वाले समय में केवल अपनी खाद्य जरूरतें पूरी करने वाला देश नहीं, बल्कि दुनिया का ‘फूड बास्केट’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

छोटे किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में औसत कृषि जोत महज 0.96 हेक्टेयर है। ऐसे में छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती में विविधीकरण जरूरी है। उन्होंने अनाज के साथ फल-सब्जियां, औषधीय खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और प्राकृतिक खेती को जोड़कर इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल अपनाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि कृषि को आधुनिक तकनीक से जोड़ना भी जरूरी है। एआई, मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से खेती को अधिक उत्पादक, लाभकारी और आधुनिक बनाने की दिशा में सरकार काम कर रही है। कार्यक्रम में एग्रीविज़न के 10 वर्षों के सफर पर आधारित विशेष पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। राष्ट्रीय अधिवेशन में देशभर से कृषि वैज्ञानिक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।


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