चाय उद्योग पर संकट के बादल, रिकॉर्ड निर्यात के बावजूद बड़ी चिंता
(सभी तस्वीरें- हलधर)भारत की चाय उद्योग ने साल 2025 में रिकॉर्ड करीब 280 मिलियन किलोग्राम चाय निर्यात कर नया इतिहास रचा, लेकिन अब 2026 में इस सेक्टर पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, शिपिंग लागत में उछाल और वैश्विक बाजार की अनिश्चितता ने चाय कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है।
मिडिल ईस्ट संकट बना सबसे बड़ा खतरा
भारत की ऑर्थोडॉक्स चाय का बड़ा हिस्सा UAE, ईरान, इराक और खाड़ी देशों में जाता है। लेकिन पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री मार्गों पर खतरे की वजह से निर्यात प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। उद्योग संगठनों का कहना है कि यदि हालात लंबे समय तक बने रहे तो भारतीय चाय के निर्यात, भुगतान और कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है।
रिकॉर्ड निर्यात के बाद भी क्यों बढ़ी चिंता
चाय बोर्ड और उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार भारत ने 2025 में रिकॉर्ड निर्यात से करीब 8,400 करोड़ रुपये की कमाई की थी। चीन और मिडिल ईस्ट से मजबूत मांग ने इस उपलब्धि में बड़ी भूमिका निभाई। लेकिन अब बढ़ती लॉजिस्टिक लागत, मौसम की मार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा उद्योग के लिए नई चुनौती बन रही है।
मौसम और बढ़ती लागत ने बढ़ाई मुश्किल
चाय उत्पादक राज्यों में अनियमित बारिश और गर्मी का असर उत्पादन पर भी दिख रहा है। दूसरी ओर मजदूरी, खाद, ईंधन और परिवहन खर्च बढ़ने से उत्पादन लागत लगातार ऊपर जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति रही तो आने वाले महीनों में घरेलू बाजार में चाय की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।
नए बाजार तलाशने में जुटी कंपनियां
स्थिति से निपटने के लिए भारतीय कंपनियां अब अमेरिका, कनाडा और दक्षिण अमेरिका जैसे नए बाजारों पर फोकस कर रही हैं। उद्योग संगठनों ने सरकार से निर्यात प्रोत्साहन और नए ट्रेड सपोर्ट की मांग भी की है, ताकि चाय उद्योग की रफ्तार बनी रहे।