नौकरी के अनुभव को बनाया ताकत, अब खेती से लाखों की कमाई 

नई दिल्ली 14-Oct-2026 04:12 PM

नौकरी के अनुभव को बनाया ताकत, अब खेती से लाखों की कमाई 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

हलधर टाइम्स/ चितावा, नागौर। जिसने हाथों की मेहनत पर भरोसा करके जड़मति को सुजान करना सीख लिया हो, उसके लिए रास्ते की दिक्कत मायने नहीं रखती। कुछ ऐसे ही अनुभव है किसान अशोक कुमार सेन के। जिन्होंने पहले संरक्षित खेती से जुड़े एक प्रोजेक्ट में मासिक वेतन के आधार पर काम करना शुरू किया। जब संरक्षित फसल उत्पादन की बारिकियां सीख ली तो समृद्धि की राह पकड़ ली। बता दें कि किसान अशोक पॉली हाउस लीज पर लेकर खेती कर रहे है और सालाना 14-15 लाख रूपए की आमदनी ले रहे है। किसान अशोक ने हलधर टाइम्स को बताया कि स्नातक करने के बाद गांव में ही संरक्षित खेती से जुड़े एक प्रोजेक्ट में काम करना शुरू कर दिया। इससे संरक्षित के साथ-साथ ओपन फील्ड में सब्जी उत्पादन का अनुभव गहरा होता चला गया। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट बंद हुआ तो नौकरी छूट गई। इसके बाद 12 हजार वर्ग मीटर में लगे पॉली हाउस और नेट हाउस का लीज पर लिया और अपने अनुभव को धरातल देना शुरू किया। परिणाम है कि अब लीज राशि चुकाने के बाद भी बेहत्तर लाभ प्राप्त कर रहा हॅू। उन्होंने बताया कि संरक्षित खेती में सारा खेल सही समय, सही विधि और सही मात्रा में फसल को खाद-पानी देने का है। इसमें जरा सी चूक मुश्किल में डाल देती है। उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए फार्मपौंड बना हुआ है और ट्यूबवैल भी है। परम्परागत फसलो में मूंगफली, बाजरा, गेहूं, चना और सरसों का उत्पादन लेता हॅू।

अब नौकरी से ज्यादा आमदनी

उन्होंने बताया कि संरक्षित खेती की शुरूआत खीरा फसल से हुई है। खीरे का उत्पादन जारी है। लेकिन, बदलती जलवायु और कीट-रोग के बढ़ते प्रकोप से निजात पाने के लिए अब रंगीन शिमला मिर्च की पैदावार लेना भी शुरू कर दिया है। क्योंकि, खीरे की खेती में अब मुनाफा कम होता जा रहा है। उन्होने बताया कि खीरे की एक फसल से औसत 3-4 लाख रूपए की बचत मिलती है। जबकि, शिमला मिर्च से सालाना 10-12 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। लेकिन, यह आमदनी बाजार भाव पर निर्भर करती है।

तैयार किया फसल चक्र

उन्होंने बताया कि 4-4 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में बने दो पॉली हाउस और एक शैडनेट हाउस लीज पर लिया हुआ है। इससे फसल चक्र तैयार करने में मदद मिली है। यानी एक साल एक संरक्षित संरचना को खाली छोड़ता हॅू। ताकि, कीट-रोग का प्रकोप कम हो। उन्होने बताया कि ओपन फील्ड में भी सब्जी उत्पादन का प्रयास किया। लेकिन, बाद में लेबर लागत को देखते हुए बंद कर दिया।


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