रबी में प्याज की खेती से बढ़ेगी कमाई, जानें उन्नत किस्में

नई दिल्ली 15-Oct-2026 01:09 PM

रबी में प्याज की खेती से बढ़ेगी कमाई, जानें उन्नत किस्में

(सभी तस्वीरें- हलधर)

प्याज एक महत्वपूर्ण व्यापारिक फसल है। प्याज का उपयोग प्रतिदिन सब्जी और मसाले के रूप में किया जाता है। प्याज में कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ कई प्रकार के तत्व जैसे सल्फर, कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन सी आदि काफी मात्रा में पाए जाते हैं। प्रदेश में प्याज की खेती वैसे तो सभी जिलों में की जा सकती है। लेकिन, बड़े रूप में प्याज की खेती के लिए भूमि अधिक क्षारीय और अम्लीय नहीं होनी चाहिए। गौरतलब है कि जयपुर, टोंक, जोधपुर, सीकर और अलवर जिले में रबी प्याज की खेती प्रमुखता से किसान करते हैं। प्रदेश में रबी प्याज का क्षेत्रफल 45 लाख हेक्टेयर है।

उन्नत किस्म

  • लाल रंग की: पूसा रेड, एग्रोवेड, माधवी, अर्का निकेतन, बिंदु, कीर्तिमान, ललिमा, एग्रीफाउंड लाइट रेड, उदयपुर-101, 103।

  • पीले रंग की: अर्का पीताम्बर, फुले स्वर्णा, अर्ली ग्रेनो, ब्राउन स्पैनिश।

  • सफेद रंग की: पूसा व्हाइट राउंड, व्हाइट फ्लैट, उदयपुर-102, एग्रीफाउंड व्हाइट, एल-257-9-1।

  • बुवाई समय: अक्टूबर से मध्य नवम्बर तक।

  • बीज दर: 10-12 किग्रा प्रति हेक्टेयर।

  • बल्ब (कंद): 1000-1200 किग्रा प्रति हेक्टेयर।

  • बीजोपचार: 2-3 ग्राम कार्बेक्सिन अथवा कारबेन्डाजिम।

नर्सरी में पौध तैयार करना

रबी प्याज की उन्नत किस्म के बीज को 3 मीटर लम्बी, 1 मीटर चौड़ी और 20-25 सेमी ऊंची उठी हुई क्यारियां बनाकर बुवाई करें। 500 वर्ग मीटर क्षेत्र में तैयार की गई नर्सरी की पौध एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए पर्याप्त होती है। प्रत्येक क्यारी में 40 ग्राम डीएपी, 25 ग्राम यूरिया, 30 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश और 10-15 ग्राम फ्यूराडोन डालकर अच्छी तरह मिट्टी में मिला दें। अक्टूबर माह में क्यारियों को तैयार करके क्लोरोपायरीफॉस 2 ईसी (2 मिली./लीटर पानी) अथवा कार्बेन्डाजिम (1 ग्राम/लीटर पानी) को घोलकर क्यारी की मिट्टी को तर करके 250 गेज मोटी सफेद पॉलिथिन बिछाकर 25-30 दिन तक मिट्टी का उपचार कर लें। उपचारित बीजों को 5-10 सेमी. के अंतर पर बनाई गई कतार (1 सेमी की गहराई) पर बुवाई करें। अंकुरण के पश्चात पौध को जड़गलन बीमारी से बचाने के लिए 2 ग्राम थाइराम अथवा 1 ग्राम बाविस्टीन दवा को 1 लीटर पानी में घोल करके छिड़काव करें। बुवाई के लगभग 7-8 सप्ताह बाद पौध खेत में रोपण के लिए तैयार हो जाती है।

पौध रोपण

खेत में पौध रोपाई से पूर्व पौध की जड़ को कारबेन्डाजिम (2 ग्राम को 1 लीटर पानी का घोल) में 15-20 मिनट डुबोकर रोपाई करें ताकि फसल को बैगनी धब्बा रोग से बचाया जा सके।

  • कतार की दूरी: 15 सेमी.

  • पौधे की दूरी: 8-10 सेमी.

  • खाद-उर्वरक: 30-35 टन गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर। 80 किग्रा नाइट्रोजन, 50 किग्रा फास्फोरस और 80 किग्रा पोटाश प्रति हेक्टेयर। नाइट्रोजन की आधी मात्रा 2 बराबर भाग में बांटकर रोपाई के 30 दिन और 45 दिन बाद छिड़क कर दें। इसके अतिरिक्त 50 किलोग्राम सल्फर और 5 किग्रा जिंक प्रति हेक्टेयर की दर से रोपाई के पूर्व डालना भी उपयुक्त रहता है।


ट्रेंडिंग ख़बरें