खेती में नई क्रांति: जीवामृत से बढ़ेगा उत्पादन

नई दिल्ली 27-Jan-2026 01:11 PM

खेती में नई क्रांति: जीवामृत से बढ़ेगा उत्पादन

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जीवामृत 100 प्रतिशत जैविक है और इसका मिट्टी के स्वास्थ्य पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता है। यह दो शब्दों जीवन और अमृत से मिलकर बना है। पहला शब्द जीवन का अर्थ है जीवन और दूसरे शब्द अमृत का अर्थ है औषधीय दवा। 

सामग्री

  • देशी गाय का गोबर-10 किग्रा.
  • देशी गाय का मूत्र- 8-10 लीटर
  • गुड़ -1-2 किग्रा
  • बेसन -1-2 कि.ग्रा.
  • पानी -180 लीटर
  • पेड़ के नीचे की मिट्टी-1 किग्रा.

जीवामृत निर्माण विधि

उपरोक्त सामग्रियों को प्लास्टिक के एक ड्रम में डालकर लकड़ी के एक डंडे से घोलना है । इस घोल को दो से तीन दिन तक सडऩे के लिए छाया में रख देना है। प्रतिदिन दो बार सुबह-शाम घड़ी की सुई की दिशा में लकड़ी के डंडे से दो मिनट तक इसे घोलना है और जीवामृत को बोरे से ढक देना हैÓ। इसके सडऩे से अमोनिया, कार्बनडाईआक्साइड, मीथेन जैसी हानिकारक गैसों का निर्माण होता है। गर्मी के महीने में जीवामृत बनने के बाद सात दिन तक उपयोग में लाना है और सर्दी के महीने में 8 से 15 दिन तक उसका उपयोग कर सकते हैं। उसके बाद बचा हुआ जीवामृत भूमि पर फेंक देना है।

जीवामृत का छिड़काव

गन्ना, केला, गेहूं, ज्वार, मक्का, अरहर, मूंग, उड़द, चना, सूरजमुखी, कपास, अलसी, सरसों बाजरा, मिर्च, प्याज, हल्दी, अदरक, बैंगन, टमाटर, आलू, लहसुन, हरी सब्जियां, फूल, औषधियुक्त पौध्ेा, सुगन्धित पौधें आदि सभी पर 2 से लेकर 8 महीने तक जीवामृत छिड़कने की विधि इस तरह है। आप महीने में कम से कम एक बार, दो बार या तीन बार जीवामृत का छिड़काव करें।

खड़ी फसल पर जीवामृत का छिड़काव 

60 से 90 दिन की फ सलें

  • पहला छिड़काव: बीज बुआई के 21 दिन बाद प्रति एकड़ 100 लीटर पानी और 5 लीटर कपड़े से छाना हुआ जीवामृत मिलाकर छिड़काव करें।
  • दूसरा छिड़काव: पहले छिड़काव के 21 दिन बाद प्रति एकड़ 200 लीटर पानी और 20 लीटर जीवामृत को मिलाकर छिड़काव करें।
  • तीसरा छिड़काव: दूसरे छिड़काव के 21 दिन बाद प्रति एकड़ 200 लीटर पानी और 5 लीटर खट्टी छाछ अथवा लस्सी मिलाकर छिड़काव करें।

90 से 120 दिन की फ सलें

  • पहला छिड़काव: बीज बुआई के 21 दिन बाद प्रति एकड़ 100 लीटर पानी और 50 लीटर कपड़े से छाना हुआ जीवामृत मिलाकर छिड़काव करें।
  • दूसरा छिड़काव: पहले छिड़काव के 21 दिन बाद प्रति एकड़ 150 लीटर पानी और 10 लीटर छाना हुआ जीवामृत मिलाकर छिड़काव करें।
  • तीसरा छिड़काव: दूसरे छिड़काव के 21 दिन बाद प्रति एकड़ 200 लीटर पानी और 20 लीटर जीवामृत मिलाकर छिड़काव करें।
  • चौथा और आखिरी छिड़काव: यदि दाने दूध की अवस्था में या फल बाल्यावस्था में हों तो प्रति एकड़ 200 लीटर पानी और 5 लीटर खट्टी छाछ या 2 लीटर नारियल का पानी मिलाकर छिड़काव करें।
  • 120 से 135 दिन की फसलें
  • पहला छिड़काव: बीज बुआई के एक माह बाद प्रति एकड़ 200 लीटर पानी और 5 लीटर कपड़े से छाना हुआ जीवामृत मिलाकर छिड़काव करें।
  • दूसरा छिड़काव: पहले छिड़काव के 21 दिन बाद प्रति एकड़ 150 लीटर पानी और 10 लीटर जीवामृत मिलाकर छिड़काव करें।
  • तीसरा छिड़काव: दूसरे छिड़काव के 21 दिन बाद प्रति एकड़ 200 लीटर पानी और 5 लीटर खट्टी छाछ अथवा लस्सी मिलाकर छिड़काव करें।
  • चौथा छिड़काव: तीसरे छिड़काव के 21 दिन बाद प्रति एकड़ 200 लीटर पानी 20 लीटर जीवामृत में मिलाकर छिड़काव करें।
  • पांचवा और आखिरी छिड़काव: यदि दाने दूध की अवस्था में अथवा फ ल बाल्यावस्था में हों तो प्रति एकड़ 200 लीटर पानी और 5 लीटर खट्टी छाछ अथवा 2 लीटर नारियल का पानी मिलाकर छिड़काव करें।
  • आखिरी छिड़काव: दाने दूध की अवस्था में, फ ल बाल्यावस्था में हों तो प्रति एकड़ 200 लीटर पानी और 5 लीटर खट्टी छाछ या 2 लीटर नारियल का पानी मिलाकर छिड़काव करें।

165 से 180 दिन की फसलें

  • पहला छिड़काव: बीज बुआई के एक माह बाद प्रति एकड़ 150 लीटर पानी और 5 लीटर कपड़े से छाना हुआ जीवामृत मिलाकर छिड़काव करें।
  • > दूसरा छिड़काव: पहले छिड़काव के 21 दिन बाद प्रति एकड़ 150 लीटर पानी और 10 लीटर जीवामृत मिलाकर छिड़काव करें।
  • तीसरा छिड़काव: दूसरे छिड़काव के 21 दिन बाद प्रति एकड़ 200 लीटर पानी और 5 लीटर खट्टी छाछ या लस्सी मिलाकर छिड़काव करें।
  • चौथा छिड़काव: तीसरे छिड़काव के 21 दिन बाद प्रति एकड़ 200 लीटर पानी 20 लीटर जीवामृत में मिलाकर छिड़काव करें।
  • पांचवा छिड़काव: चौथे छिड़काव के 21 दिन बाद प्रति एकड़ 200 लीटर पानी और 20 लीटर जीवामृत मिलाकर छिड़काव करें।
  • आखिरी छिड़काव: यदि दाने दूध की अवस्था में अथवा फल बाल्यावस्था में हों तो प्रति एकड़ 200 लीटर पानी और 20 लीटर जीवामृत मिलाकर छिड़काव करें।

गन्ना, केला, पपीता पर जीवामृत का छिड़काव

इन फसलों पर बीज बोने अथवा रोपाई के बाद पांच महीने तक ऊपर दी गई विधि के अनुसार छिड़काव करें। उसके बाद हर 15 दिन में प्रति एकड़ 20 लीटर जीवामृत कपड़े से छानकर 200 लीटर पानी में घोल बनाकर गन्ना, केला तथा पपीते के पौधें पर छिड़काव करें।

सभी फलदार पेड़ों पर छिड़काव

फलदार पौधें चाहे उनकी उम्र कोई भी हो पर महीने में दो बार जीवामृत का छिड़काव करें। जीवामृत की मात्रा 20 से 30 लीटर  कपड़े से छानकर 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़कना है। फ ल पकने से 2 महीने पहले फलदार पौधें पर नारियल का पानी 2 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इसके 15 दिन बाद 5 लीटर खट्टी छाछ अथवा लस्सी 200 लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें। 


ट्रेंडिंग ख़बरें