वैज्ञानिकों की बड़ी खोज: कुसुम से बदलेगा देश का तेल भविष्य

नई दिल्ली 23-Jan-2026 12:52 PM

वैज्ञानिकों की बड़ी खोज: कुसुम से बदलेगा देश का तेल भविष्य

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। देश को खाद्य तेल में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कृषि वैज्ञानिकों का बड़ी सफलता हाथ लगी है। वैज्ञानिकों ने तिलहनी फसल कुसम के जीनोम की पहचान करने के साथ ही जीनोम असेंबली को विकसित किया है। इससे कुसुम की नई किस्मों के विकास को बल मिलेगा। साथ ही, तेल उत्पादन और किस्मों में आवश्यक सुधार में भी प्रगति देखने को मिलेगी। गौरतलब है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद के सहयोग से कुसुम पर रिसर्च कर रहे है। यह शोध कार्य कुसुम सुधार के लिए आनुवंशिक विविधता उपयोग नामक एक नेटवर्क परियोजना के तहत किया जा रहा है। 

60 हजार प्रोटीन-कोडिंग जीन की पहचान

कुसुम सुधार में लंबे समय से जीनोमिक संसाधनों का अभाव रहा है। इस कमी को दूर करते हुए, शोधकर्ताओं ने कुसुम का 1.15-गीगा बेस के तहत जीनोम असेंबली तैयार किया, जिसमें टेलोमेरिक और सेंट्रोमेरिक क्षेत्रों को हल किया गया और लगभग 60,000 प्रोटीन-कोडिंग जीन की पहचान की गई। बता दें कि कुसुम सूखा-सहिष्णु फसल है, जो अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। इससे ओलिक और लिनोलिक एसिड से भरपूर तेल मिलता है। जिसका उपयोग खाद्य, बायोफ्यूल, सौंदर्य प्रसाधन, फार्मास्यूटिकल्स, न्यूट्रास्यूटिकल्स और प्राकृतिक रंगों में किया जाता है।  

शोध ऐसे बनेगा उपयोगी

जीन की खोज से परे, शोधकर्ताओं ने उच्च तेल सामग्री वाली कुलीन कुसुम किस्मों की भी पहचान की है। वहीं, बड़ी संख्या में परिवर्तनीय जीन वाले एक्सेसन्स को भी पहचाना है। जो नई किस्मों  विकास के साथ-साथ तेल की मात्रा बढाने में भी सहायक होगा। साथ ही, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को घटाने में भी मददगार साबित होगा। 


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