पश्चिमी राजस्थान में सूखे का साया, ग्वार-मूंग-बाजरा फसलें सूखने लगीं
(सभी तस्वीरें- हलधर)हलधर टाइम्स
जयपुर। बंगाल की खाड़ी में बने नए सिस्टम से दक्षिणी-पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में मूसलाधार बारिश देखने को मिल रही है। भरतपुर, दौसा, बारां, झालावाड़, सवाईमाधोपुर में ज्यादा बारिश के चलते जन जीवन प्रभावित हुआ है। वहीं, जिला मुख्यालय से कई गांवों का सम्पर्क कट गया है। जबकि, पश्चिमी राजस्थान अब भी बारिश को तरस रहा है। यहां पर बारिश के अभाव में खरीफ फसल दम तोड़ने लगी है। इससे किसानों का चिंता बढ़ गई है। मौसम पूर्वानुमानों पर गौर करें तो पश्चिमी राजस्थान के लिए कोई अलर्ट जारी नहीं है। किसानों का कहना है कि फसलों की स्थिति देखते हुए अब दाना घर आने की उम्मीद टूटती जा रही है। सिंचाई के अभाव में ग्वार, मूंग, मोठ, बाजरा, ज्वार आदि फसल सूखने लगी है। फसल बढ़वार रुक गई है। पत्ते पीले पड़कर झड़ना शुरू हो गए है। भविष्य में पशुओं के लिए चारे की समस्या आना तय है। वहीं, दक्षिणी-पूर्वी जिलों में मानसून की मेहरबानी से मक्का, बाजरा और ज्वार फसल में मंजर निकलना शुरू हो गए है। वहीं, दलहनी फसलों में भी फूल खिलने लगे है। गौरतलब है कि प्रदेश के आधा दर्जन से ज्यादा जिले इस साल सूखे की चपेट में है।
रबी में आयेगी दिक्कत
प्रदेश में मानसून की कम बारिश के चलते किसानों को रबी फसल उत्पादन में दिक्कत आना तय है। क्योंकि, अब भी लघु और मंझोले श्रेणी के करीब 200 बांध सूखे चल रहे है। बता दें कि प्रदेश में इस श्रेणी के 693 बांध है। जिनमें 431 बांध आंशिक रूप से भरे हुए है। वहीं, 62 बांध ओवरफ्लो की स्थिति में पहुंच चुके है।
मूंग-बाजरे में कातरा
मूंग और बाजरे की फसल में कातरा नियंत्रण के लिए किसान क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण का 6 किलो प्रति बीघा की दर से बुरकाव करें।
चारे के भाव में बढ़ोतरी तय
पश्चिमी राजस्थान में अपेक्षानुरूप बारिश नहीं होने से हरे और सूखे चारे के भावों में बढ़ोतरी होना तय है। सूखा चारे का जो स्टाक किसानों के पास है, वह खत्म होता जा रहा है। किसानों के अनुसार बाजरे-ज्वार की बढ़वार नहीं कुट्टी की उपलब्धता मुश्किल होगी।
16 जिलो में सामान्य से कम बारिश
प्रदेश में अब तक हुई बारिश के लिहाज से करीब 16 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। जबकि, भरतपुर, डीग और धौलपुर में सामान्य से ज्यादा बारिश इस साल हुई है। सामान्य से कम बारिश वाले जिलों में बालोतरा, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, डूंगरपुर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जालौर, जोधपुर, कोटपूतली-बहरोड़, पाली, प्रतापगढ़, राजसमंद, सिरोही और उदयपुर जिला शामिल है।
हरा तेला और थ्रिप्स का नियंत्रण
हरा तेला और थ्रिप्स का काफी प्रकोप देखने को मिल रहा है। रोग पर नियंत्रण करने के लिए किसानों को फ्लोनाकामिट 50 डब्ल्यूजी, डायनेटूफ्युरान 20 डब्ल्यूजी, पायरीप्रोक्सिफेन 10 ईसी, थायोमेथोक्ज़ाम 25 डब्ल्यूजी का छिड़काव करना चाहिए।
ग्वार: ग्वार फसल में बैक्टीरियल ब्लाइट का प्रकोप सामने आया है। नियंत्रण के लिए किसान सुडोमोनास 6 एमएल + बैक्टीरिया माइसिन 0.33 प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।
तम्बाकू-चने की इल्ली
सोयाबीन फसल में सेमीलूपर, तम्बाकू और चने की इल्ली का प्रकोप देखने को मिल रहा है। इनके नियंत्रण के लिए किसान क्यूनालफॉस 25 ईसी 1500 मिली अथवा इन्डोक्साकार्ब 14.5 एससी 300 मिली अथवा फ्लूबेन्डीयामाईड 39.35 एससी 150 मिली प्रति हैक्टेयर की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें। जिन किसानों के यहां पत्ते खाने वाली इल्ली के साथ सफेद मक्खी का प्रकोप हुआ है वह बीटासायफ्लूथ्रीन + इमिडाक्लोप्रीम 350 मिली प्रति हैक्टेयर की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।
लक्ष्य से 7 फीसदी बुवाई कम
प्रदेश में खरीफ फसलों की बुवाई 1.65 करोड़ हैक्टेयर की तुलना में 1.53 करोड़ हैक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है। जो लक्ष्य का 93 फीसदी है। कृषि विभाग के अनुसार अब फसल बुवाई क्षेत्रफल बढ़ने की संभावनाएं नगण्य हो चुकी है।
फसल बुवाई एक नजर
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फसल |
बुवाई क्षेत्र (हैं. लाख में) |
फसल |
बुवाई क्षेत्र (हैं. लाख में) |
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धान |
3.43 |
ज्वार |
6.61 |
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बाजरा |
40.50 |
मक्का |
9.76 |
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मूंग |
23.16 |
मोठ |
9.11 |
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उड़द |
3.98 |
तिल |
1.89 |
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मूंगफली |
11.18 |
सोयाबीन |
9.31 |
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कपास |
5.34 |
ग्वार |
22.22 |