अचानक क्यों थम गई बारिश? जानिए कैसे बचे मॉनसून ब्रेक के अल नीनो कनेक्शन से
अचानक क्यों थम गई बारिश? जानिए कैसे बचे मॉनसून ब्रेक के अल नीनो कनेक्शन से
(सभी तस्वीरें- हलधर)नई दिल्ली। जुलाई की शुरुआत में झमाझम बारिश ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला दी थी, लेकिन कुछ ही दिनों बाद मौसम ने अचानक करवट बदल ली। तेज धूप, उमस और बारिश पर ब्रेक ने किसानों की चिंता फिर बढ़ा दी है। सवाल उठ रहा है कि आखिर मॉनसून अचानक कमजोर क्यों पड़ गया? क्या यह अल नीनो का असर है या फिर यह मॉनसून का सामान्य चक्र है? और सबसे बड़ा सवाल—क्या इसका असर फसलों, महंगाई और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा?
क्या है मॉनसून ब्रेक?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह स्थिति "मॉनसून ब्रेक" कहलाती है। जब मानसूनी ट्रफ मैदानी इलाकों से खिसककर हिमालय और पहाड़ी क्षेत्रों की ओर चली जाती है, तब उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में बारिश कम हो जाती है। यह मॉनसून का सामान्य चरण है और हर साल किसी न किसी समय देखने को मिलता है।मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक बारिश सीमित रह सकती है, जबकि 19 जुलाई के बाद उत्तर-पश्चिम भारत में फिर से अच्छी बारिश की संभावना बन रही है।
जून की कमी पूरी नहीं हो सकी
इस वर्ष जून में देशभर में सामान्य से करीब 40% कम बारिश दर्ज की गई थी। जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश होने से यह कमी घटकर 19% रह गई, लेकिन अब बारिश रुकने से रिकवरी की रफ्तार भी थम गई है। यदि जुलाई के दूसरे पखवाड़े में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो बारिश का कुल घाटा फिर बढ़ सकता है।
कम बारिश से खरीफ बुवाई प्रभावित
बारिश की कमी का सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई पर दिखाई दे रहा है। इस वर्ष 10 जुलाई तक खरीफ बुवाई का रकबा पिछले साल की तुलना में लगभग 16% कम रहा।
सबसे अधिक असर इन फसलों पर पड़ा है—
पर्याप्त नमी नहीं मिलने के कारण कई किसान अभी भी बुवाई का इंतजार कर रहे हैं।
सरकार ने किसानों को दी नई सलाह
स्थिति को देखते हुए कृषि विशेषज्ञ और सरकार किसानों को कम अवधि वाली फसलें अपनाने की सलाह दे रहे हैं। जिन क्षेत्रों में बारिश देर से पहुंची है, वहां किसानों को मक्का, बाजरा और मूंग जैसी फसलों की बुवाई करने की सलाह दी जा रही है, ताकि उत्पादन का नुकसान कम किया जा सके।
क्या महंगाई बढ़ सकती है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश सामान्य नहीं हुई तो उत्पादन घट सकता है। इससे दलहन, तिलहन और खाद्यान्नों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। जरूरत पड़ने पर देश को अधिक आयात करना पड़ सकता है, जिससे खाद्य महंगाई और बढ़ने का खतरा रहेगा। कृषि का देश की जीडीपी में लगभग 17-18% योगदान है और करीब 40% आबादी की आजीविका इससे जुड़ी है। इसलिए कमजोर मॉनसून का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
क्या अल नीनो है इसकी वजह?
जलवायु वैज्ञानिकों के अनुसार फिलहाल बारिश में आई कमी का मुख्य कारण मॉनसून ब्रेक है, लेकिन आने वाले महीनों में अल नीनो बड़ा असर डाल सकता है।अल नीनो प्रशांत महासागर के गर्म होने से बनने वाली जलवायु स्थिति है, जो भारत सहित दुनिया के कई देशों में बारिश को प्रभावित करती है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसका प्रभाव सितंबर के बाद अधिक स्पष्ट हो सकता है। इसके साथ ही वैज्ञानिक इंडियन ओशन डायपोल (IOD) पर भी नजर बनाए हुए हैं। यदि IOD सकारात्मक रहता है तो वह अल नीनो के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकता है और भारत में बारिश बेहतर हो सकती है।
आगे क्या है चुनौती?
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना बेहद जरूरी है। यदि जुलाई के दूसरे पखवाड़े और अगस्त में अच्छी बारिश होती है तो खरीफ सीजन काफी हद तक संभल सकता है। लेकिन यदि मॉनसून लगातार कमजोर रहा और सितंबर में अल नीनो सक्रिय हुआ, तो फसल उत्पादन, खाद्य महंगाई और देश की अर्थव्यवस्था—तीनों पर दबाव बढ़ सकता है।कुल मिलाकर, इस बार किसानों के लिए हर बारिश की बूंद बेहद अहम है। आने वाले कुछ सप्ताह तय करेंगे कि खरीफ सीजन रिकॉर्ड उत्पादन देगा या फिर कमजोर मॉनसून खेती और बाजार दोनों की चिंता बढ़ा देगा।