चीन-अमेरिका से आगे निकली भारतीय खेती! आज़ादी के 75 साल में पहली बार बना रिकॉर्ड
चीन-अमेरिका से आगे निकली भारतीय खेती! आज़ादी के 75 साल में पहली बार बना रिकॉर्ड
(सभी तस्वीरें- हलधर)नई दिल्ली। भारतीय कृषि ने एक ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। आज़ादी के बाद पहली बार भारत ने लगातार 10 वर्षों तक कृषि विकास की ऐसी रफ्तार दर्ज की है, जो न सिर्फ देश के इतिहास में सबसे अधिक है, बल्कि चीन और अमेरिका जैसे बड़े देशों को भी पीछे छोड़ देती है। कृषि विशेषज्ञ रमेश चंद और जसपाल सिंह की रिपोर्ट के अनुसार, 2015-16 से 2024-25 के दौरान भारत की कृषि क्षेत्र ने औसतन 4.45% की वार्षिक विकास दर हासिल की। पिछले 75 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है कि खेती लगातार एक दशक तक इतनी तेज गति से बढ़ी हो।
हरित क्रांति का रिकॉर्ड भी टूटा
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि 1970 और 80 के दशक की हरित क्रांति के दौरान भी कृषि विकास की औसत रफ्तार 3.56% ही रही थी। यानी मौजूदा दशक में भारतीय कृषि ने इतिहास की सबसे तेज विकास दर दर्ज की है।
कोरोना काल में भी बनी रही कृषि की ताकत
रिपोर्ट बताती है कि पिछले 10 वर्षों में भारतीय कृषि की विकास दर कभी भी नकारात्मक नहीं रही। कोरोना महामारी के दौरान जब उद्योग, व्यापार और सेवाएं ठप थीं, तब भी किसानों ने खेती जारी रखी। कृषि क्षेत्र ने उस कठिन दौर में देश की अर्थव्यवस्था को संभालने में अहम भूमिका निभाई।
चीन और अमेरिका से आगे भारत
कृषि विकास दर के मामले में भारत ने कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ दिया है।
ये आंकड़े बताते हैं कि कृषि विकास की रफ्तार में भारत दुनिया के प्रमुख देशों से आगे निकल चुका है।
क्यों बदल रही है भारतीय खेती की तस्वीर?
विशेषज्ञों का मानना है कि अब किसान केवल गेहूं और धान जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर नहीं हैं। वे अपनी आय बढ़ाने के लिए डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी और मसाला उत्पादन की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
इन्हीं क्षेत्रों ने कृषि को मौसम और बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इन फसलों में सबसे तेज बढ़ी खेती
आंकड़ों के अनुसार, किसानों का रुझान अब अधिक लाभ देने वाली फसलों की ओर बढ़ रहा है।
वहीं, गेहूं और चावल जैसे खाद्यान्नों की विकास दर 2.36% रही, जबकि कपास और जूट जैसी फसलों में -0.28% की गिरावट दर्ज की गई।
भारतीय कृषि का नया दौर
ये आंकड़े संकेत देते हैं कि भारतीय खेती अब केवल खाद्यान्न उत्पादन तक सीमित नहीं है। किसान बाजार की मांग के अनुसार फसल विविधीकरण अपना रहे हैं और डेयरी, मत्स्य पालन, बागवानी तथा मसाला उत्पादन जैसे क्षेत्रों से अपनी आय बढ़ा रहे हैं। यही बदलाव भारत की कृषि को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है।