कमजोर मॉनसून के बीच बढ़ी गन्ने की खेती धान-दाल-तिलहन की बुवाई घटी, बढ़ेगी महंगाई?
कमजोर मॉनसून के बीच बढ़ी गन्ने की खेती धान-दाल-तिलहन की बुवाई घटी, बढ़ेगी महंगाई?
(सभी तस्वीरें- हलधर)नई दिल्ली। देश में कमजोर मॉनसून का असर अब खेतों से लेकर आम आदमी की रसोई तक दिखाई देने लगा है। एक ओर धान, दलहन, तिलहन और कपास जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, तो दूसरी ओर अधिक पानी की जरूरत वाली गन्ने की खेती लगातार बढ़ रही है। ऐसे में विशेषज्ञों ने आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई बढ़ने और खाने-पीने की वस्तुओं के महंगे होने की आशंका जताई है।
खाद्य महंगाई ने फिर पकड़ी रफ्तार
जून में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खाद्य महंगाई बढ़कर 5.32% पर पहुंच गई, जबकि मई में यह करीब 5% थी। वहीं, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के अनुसार खाद्य महंगाई 3.6% से बढ़कर लगभग 5.5% हो गई। यह संकेत है कि आने वाले समय में खाद्य पदार्थों की कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है।
कमजोर मॉनसून से खरीफ बुवाई प्रभावित
5 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार इस खरीफ सीजन में धान, दलहन और तिलहन की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम रही है। जुलाई खरीफ बुवाई का सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है। यदि बारिश की रफ्तार नहीं बढ़ी तो उत्पादन प्रभावित होने के साथ बाजार में खाद्यान्न की उपलब्धता भी घट सकती है।
तिलहन और कपास में सबसे ज्यादा गिरावट
केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार इस सीजन में सबसे बड़ी गिरावट तिलहन की बुवाई में दर्ज की गई है, जहां रकबा करीब 43 लाख हेक्टेयर कम रहा। इसके अलावा कपास की बुवाई में भी लगभग 19 लाख हेक्टेयर की कमी आई है।इसका सबसे अधिक असर गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में देखा गया है, जहां भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार मॉनसून के दौरान सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।
गन्ने की खेती लगातार बढ़ रही
जहां अधिकांश खरीफ फसलों का रकबा घट रहा है, वहीं गन्ने की खेती लगातार विस्तार कर रही है। वर्ष 2018-19 में देश में गन्ने का रकबा करीब 51 लाख हेक्टेयर था, जो अब बढ़कर 57 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गया है।
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है, जिसकी कुल गन्ना क्षेत्रफल में लगभग 45% हिस्सेदारी है। इसके बाद महाराष्ट्र का स्थान आता है।
इथेनॉल मिशन ने बढ़ाई गन्ने की मांग
गन्ने की खेती बढ़ने की एक बड़ी वजह देश का इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम भी माना जा रहा है। वर्ष 2014 तक पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण लगभग 1.5% था, जो बढ़कर 2021-22 में 10% और 2025-26 में 20% तक पहुंच चुका है। गन्ने के साथ-साथ मक्का भी इथेनॉल उत्पादन का प्रमुख कच्चा माल बनकर उभरा है और कुल इथेनॉल उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग 45% है।
क्या बढ़ सकती हैं खाद्य कीमतें?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कमजोर मॉनसून के कारण धान, दाल और तिलहन की बुवाई में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से उर्वरकों की कीमतें बढ़ने की आशंका भी किसानों की लागत और महंगाई दोनों पर असर डाल सकती है। कुल मिलाकर, इस बार खरीफ सीजन भारतीय कृषि के लिए चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है। एक तरफ पानी की कमी से खाद्यान्न फसलें प्रभावित हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर गन्ने जैसी नकदी फसलों का बढ़ता रकबा खेती के बदलते रुझान और किसानों की आर्थिक प्राथमिकताओं को भी साफ तौर पर दर्शाता है।