प्याज की किस्में तय करेंगी थ्रिप्स हमला, शोध में चौंकाने वाले तथ्य

नई दिल्ली 23-Dec-2025 12:25 PM

प्याज की किस्में तय करेंगी थ्रिप्स हमला, शोध में चौंकाने वाले तथ्य

(सभी तस्वीरें- हलधर)

पीयूष शर्मा

जयपुर। ज्यादा मीठा आदमी ही नहीं, सब्जी फसलों की सेहत भी खराब कर रहा है। यह बात हम नहीं, कृषि वैज्ञानिक कह रहे है। कृषि वैज्ञानिकों की माने तो ज्यादा मीठे (शर्करा) से फसल में कीटों का आक्रमण ज्यादा होता है। इससे कीटनाशी का खर्च तो बढ़ता ही है। वहीं, खेत की मृदा पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। इस बात का खुलासा हुआ प्याज फसल पर हुए शोध में। शोध में सामने आया है कि प्याज फसल में थ्रिप्स कीट का प्रकोप उन किस्मों में ज्यादा देखने को मिला है जिनमें फिनोल सामग्री और शर्करा की मात्रा अधिक थी। शोध में यह भी सामने आया है कि रेड लाइट प्याज किस्म में थ्रिप्स कीट का प्रकोप सबसे कम पाया गया है। गौरतलब है कि डॉ. सीताराम सीरवी ने प्याज की आधा दर्जन से अधिक प्याज किस्मों को शोध के लिए चुना था। शोध के दौरान फसल में थ्रिप्स कीट का प्रकोप ज्ञात किया गया। साथ ही, कीट नियंत्रण के लिए उपयुक्त कीटनाशी की मात्रा का भी आकलन किया गया। डॉ. सीरवी ने बताया कि प्याज फसल में थ्रिप्स मुख्य कीट है। इस कीट के प्रकोप से उपज आधी रह जाती है। वहीं, समय पर नियंत्रण के अभाव नुकसान का आंकड़ा और बढ़ सकता है। गौरतलब है कि प्रदेश में रबी और खरीफ में प्याज की बंपर पैदावार किसान लेते है। सीकर और अलवर प्याज उत्पादन के क्षेत्र में विशेष पहचान बना चुके है। हालांकि, प्याज का उत्पादन प्रदेश के अधिकांश जिलों में किया जाता है। लेकिन, यह ऐसी फसल है जो कभी किसानों को अर्श पर पहुंचा देती है तो कभी फर्श दिखा देती है। जैसा कि इस साल प्याज उत्पादक किसानों के साथ हो रहा है। गौरतलब है कि डॉ. सिरवी ने अपना शोध कार्य राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर के डॉ. कीट वैज्ञानिक डॉ. प्रद्युम्न सिंह के निर्देशन में किया है। वर्तमान में डॉ. सिरवी माधव विश्वविद्यालय, सिरोही में कार्यरत हैं।

क्या है थ्रिप्स

यह प्याज को नुकसान पहुंचाने वाला मुख्य कीट है। यह कीट पत्तियों की सतह पर चिपक कर रस चूसता है, जिससे पत्तियों का ऊपरी किनारा टेढ़ा हो जाता है। पत्तियों पर धब्बे पड़ जाते हैं जो बाद में हल्के सफेद रंग के हो जाते हैं, जिससे पैदावार प्रभावित होती है। उन्होंने बताया कि प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बाधित होने से उपज में गिरावट आती है। वहीं, बल्ब का आकार छोटा रह जाता है। गौरतलब है कि फसल में इस कीट का प्रकोप से 30 से 50 फीसदी नुकसान होता है।

शोध में इस पर रहा फोकस

उन्होने बताया कि मेरा शोध प्याज में पाए जाने वाले थ्रिप्स कीट और उसके प्रबंधन पर आधारित रहा। प्याज किस्मों में थ्रिप्स संवेदनशीलता पर किए अध्ययन में पाया गया कि दो किस्में अत्यधिक संवेदनशील थीं, आठ मध्यम रूप से संवेदनशील और दो कम संवेदनशील थीं।

नासिक रेड़ में ज्यादा प्रकोप

शोध के दौरान सामने आया कि प्याज किस्म नासिक रेड में प्रति पौधा थ्रिप्स की औसत संख्या सबसे अधिक दर्ज हुई। जबकि, लाइट रेड किस्म में सबसे कम। उन्होंने बताया कि बायोकेमिकल विश्लेषण से पता चला कि लाइट रेड में कुल फिनोल सामग्री सबसे ज़्यादा और कुल शर्करा सबसे कम थी। इस कारण इस प्याज किस्म में थ्रिप्स कीट का प्रकोप सबसे कम दर्ज हुआ है।

9वें स्पताह में ज्यादा प्रकोप

उन्होंने बताया कि प्याज की फसल में वैसे तो इस कीट का प्रकोप बना रहता है। लेकिन, रबी मेें 9वें सप्ताह के दौरान सबसे ज्यादा प्रकोप होता है। गौरतलब है कि शोध के लिए नासिक रेड, गौरान, भीमा शक्ति,भीमा शुभ्रा, भीमा श्वेता, लाइट रेड, अर्का कल्याण, पूसा रेड का चयन किया गया।

पीला कार्ड सबसे उपयुक्त

उन्होंने बताया कि थ्रिप्स के नियंत्रण के लिए अलग-अलग स्ट्रिप का उपयोग किया गया। इनमें पीला, नीला, हरा, सफेद, पारदर्शी स्ट्रिप शामिल थे। जिसमें पीले रंग का स्ट्रिप सबसे ज्यादा प्रभावी साबित हुआ। पीले रंग के स्ट्रिकी ट्रेप में सबसे अधिक थ्रिप्स कीट फंसे। जबकि, सबसे कम पारदर्शी स्ट्रिप में दर्ज हुए।

इनसे बढ़ी उपज

उन्होने बताया कि उपज सुधार के लिए प्रोफेनोफोस 50 प्रतिशत ईसी (टी-6) और इमिडाक्लोप्रिड 48 प्रतिशत एफएस (टी-4) प्याज के बल्ब की उपज में सुधार के लिए सबसे प्रभावी कीटनाशी साबित हुए। जबकि, लैम्डा-साइहलोथ्रिन 5 प्रतिशत ईसी (टी-1) की उपज सबसे कम थी।


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