पशुओं में संक्रामक रोग: लक्षण, बचाव और जरूरी टीकाकरण की पूरी जानकारी
(सभी तस्वीरें- हलधर)पशुधन को अधिकतर किसान अतिरिक्त आय स्रोत के रूप में देखते हैं। गुणवत्तापूर्ण दूध और बेहतर आमदनी प्राप्त करने के लिए पशुओं को स्वस्थ रखना जरूरी है। इसके लिए पशुपालकों के लिए आवश्यक है कि वह अपने पशुओं को रोगों से दूर रखें। संक्रामक रोगों से कुछ रोग ऐसे होते हैं, जिनका कोई उपचार नहीं होता है। ऐसी स्थिति में उपचार से बचाव अच्छा का रास्ता ही उचित होता है। संक्रामक रोगों को रोकथाम के लिए आवश्यक है कि पशुओं में रोग रोधक टीके निर्धारित समय पर लगाएं।
रोगी पशु के सामान्य लक्षण
पशु खाने-पीने में रुचि नहीं लेता है। पशु सुस्त और कमजोर हो जाता है। उसकी आदतों और व्यवहार में परिवर्तन होता है। थूथन गीले की जगह सूखा रहता है। गोबर और लीद पतली, बदबूदार और आंव वाली हो जाती है। पशु की त्वचा ढीली व सूखी हो जाती है। बाल खड़े रहते हैं। पशु के उत्पादन में अचानक कमी हो जाती है। रोगी पशु में कई बार शारीरिक कंपन, हांफना, मुंह से लार गिरना, दांत किटकिटान आदि लक्षण दिखाई देते हैं।
संक्रामक रोग से मृत पशु के शवों का निस्तारण
क्या करें!
संक्रामक रोग से मृत पशु के शव को गड्ढा खोदकर दबा देना चाहिए।
गड्ढा लगभग 1.5 मीटर गहरा खोदकर शव पर नमक और चूने की परत बिछा दें।
मृत पशु का मल-मूत्र, चारा बिछावन अथवा खून जैसे उत्सर्जित पदार्थों को गड्ढे में शव के साथ डाल दें।
पशु बाड़े में शव स्थान पर चूना, पानी, फिनायल या ब्लीचिंग पाउडर से अथवा कागज जलाकर आग लगाकर स्थान को शुद्ध करें।
क्या न करें !!
खुले मैदान, नदी अथवा तालाब में नहीं फेंकें।
शव की खाल न उतारें।
चील, कौवों और कुत्तों के लिए खुला ना छोड़ें जो कि इस संक्रमण को एक स्थान से दूसरे स्थान पर फैलाते हैं।
बिना स्थान शुद्ध किए स्वस्थ पशु को उस स्थान पर ना बांधें।
संक्रामक रोग प्रकोप होने पर बचाव के उपाय
संक्रामक रोग के प्रारंभिक लक्षण दिखते ही रोगी पशु को दूसरे स्वस्थ पशुओं से अलग स्थान पर रखें।
रोगी पशु को दाना, चारा और पानी की व्यवस्था अलग बर्तनों में करें। रोगी पशु के उपचार के लिए पशु चिकित्सक से संपर्क करें। पशु चिकित्सक द्वारा संक्रामक रोग होने की जानकारी देने पर, रोगी पशु के उपचार के साथ-साथ पशु चिकित्सक की सलाह से आसपास के स्वस्थ पशुओं में टीकाकरण कराएं।
रोग ग्रस्त क्षेत्र में पशुओं का आवागमन नहीं करें। पशुपालक सर्वप्रथम स्वस्थ पशु का दूध निकालने तत्पश्चात रोगी पशु का दूध निकालें और हाथ, बर्तन आदि को एंटीसेप्टिक घोल जैसे लाल दवा, डिटॉल आदि से साफ करें। संक्रामक रोग से मृत पशु को गांव के बाहर लगभग 1.5 मीटर गहरे गड्ढे में चूने अथवा नमक के साथ दबा दें। मृत पशु के संपर्क में रही वस्तुओं और स्थान को भी फिनायल, लाल दवा आदि से कीटाणु रहित करें।
पशुओं में होने वाले प्रमुख संक्रामक रोग (तालिका)
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