पशुपालकों के लिए जरूरी खबर, टीकाकरण से बचेंगे पशु और खर्च

नई दिल्ली 15-Sep-2026 04:31 PM

पशुपालकों के लिए जरूरी खबर, टीकाकरण से बचेंगे पशु और खर्च

(सभी तस्वीरें- हलधर)

टीकाकरण पशुओं को संक्रामक और कई बार जानलेवा रोगों से बचाने का सबसे प्रभावी निवारक उपाय है। समय पर टीका लगने से पशुओं में रोग-प्रतिरोधक क्षमता विकसित होती है और संक्रमण की स्थिति में बीमारी की गंभीरता कम करने में मदद मिलती है।

पशुओं को गंभीर रोगों से सुरक्षा

गलघोंटू, ब्लैक क्वार्टर और खुरपका-मुंहपका जैसे रोग पशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। समय पर टीकाकरण इन रोगों से सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मृत्यु दर कम करने में सहायक

कुछ संक्रामक रोग तेजी से फैलते हैं और गंभीर अवस्था में पशुओं की मृत्यु का कारण बन सकते हैं। नियमित और निर्धारित समय पर किया गया टीकाकरण ऐसे रोगों से होने वाली मृत्यु के जोखिम को कम करने में सहायक होता है।

दूध उत्पादन में कमी से बचाव

बीमारी के कारण पशुओं में दूध उत्पादन, वृद्धि, प्रजनन क्षमता और कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। स्वस्थ पशु सामान्य रूप से उत्पादन करते हैं, जिससे पशुपालकों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।

घटता है उपचार खर्च

रोग की रोकथाम, उपचार की तुलना में अधिक किफायती उपाय है। टीकाकरण से बीमारी की संभावना कम होने पर दवाओं, उपचार और पशुचिकित्सा पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी कम किया जा सकता है।

पशुधन की उत्पादकता

स्वस्थ पशु ही बेहतर उत्पादन दे सकते हैं। इसलिए टीकाकरण केवल पशु स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि पशुपालक परिवार की आय और पशुधन आधारित आजीविका की सुरक्षा से भी जुड़ा है।

इन बातों का रखें ध्यान

  • केवल स्वस्थ पशुओं को ही टीका लगवाएं।

  • टीकाकरण हमेशा पशुचिकित्सक अथवा अधिकृत पशु स्वास्थ्यकर्मी की सलाह के अनुसार करवाएं।

  • पशुओं का टीकाकरण निर्धारित समय-सारणी के अनुसार करवाएं।

  • टीकाकरण से पहले कृमिनाशक दवा देने के संबंध में पशुचिकित्सक की सलाह लें।

  • टीकाकरण के बाद पशुओं को पर्याप्त आराम, स्वच्छ पानी और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराएं।

  • टीकाकरण का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। ताकि, आगामी टीकाकरण की तारीख याद रखने में आसानी हो।

  • बीमार अथवा कमजोर पशु के टीकाकरण के संबंध में स्वयं निर्णय न लें; पशुचिकित्सक की सलाह आवश्यक है।

केवल टीकाकरण ही पर्याप्त नहीं

रोगों से बचाव के लिए टीकाकरण के साथ पशुशाला की स्वच्छता भी जरूरी है। पशुशाला को साफ, सूखा और हवादार रखें। फर्श पर पानी जमा न होने दें और मल-मूत्र का उचित निस्तारण करें। आवश्यकता के अनुसार पशुशाला में स्वीकृत कीटाणुनाशकों का उपयोग करें। पशुओं को हमेशा स्वच्छ और ताजा पेयजल उपलब्ध कराएं। दूषित पानी अनेक रोगों के प्रसार का माध्यम बन सकता है। साथ ही, पशुओं को संतुलित और पौष्टिक आहार दें।

डॉ. विनय कुमार, डॉ. संदीप कुमार, वेटनरी कॉलेज, बीकानेर


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