खेती बनी कारोबार, डच रोज और पॉलीहाउस से किसान की कमाई 75 लाख

नई दिल्ली 06-Oct-2026 12:21 PM

खेती बनी कारोबार, डच रोज और पॉलीहाउस से किसान की कमाई 75 लाख

(सभी तस्वीरें- हलधर)

अजबपुरा, जयपुर। जब महकना हो, फूलों को चुनिए। जी हां, कु छ ऐसा ही कर दिखाया है किसान शुभम चौधरी ने। जिन्होंने गांव में सरक्षित खेती का आगाज करके कई किसानों को आय बढाने का रास्ता तो दिखाया ही। साथ ही, खेतों से मिलने वाली आमदनी आमदनी को भी 10 गुना तक बढ़ा चुके है। उनका कहना है कि पहले खेतों से सालाना 70-80 हजार रूपए की आमदनी मिलती थी। अब आमदनी का आंकड़ा बढक़र 72-75 लाख रूपए तक पहुंच चुका है। बता दें कि किसान शुभम डच रोज (विदेशी गुलाब) की खेती कर रहे है। किसान शुभम ने हलधर टाइम्स को बताया कि वर्ष 2024 से पूर्व खेतों में परम्परागत फसलों का उत्पादन होता था। लेकिन, अब खेत गुलाब की खुशबू से महक रहे है। उन्होंने बताया कि बीडीए-एलएलबी करने के बाद खेती को उद्यम बनाने का मन बनाया। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजना के तहत 16 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र से अधिक में 4 पॉली हाउस स्थापित किए। इससे पूर्व मैं आईएचआईटीसी, दुर्गापुरा से डच रोज की खेती का प्रशिक्षण ले चुका था। पॉली हाउस स्थापना के साथ ही सिंचाई के लिए फार्मपौंड भी खुदवाया। उन्होंने बताया कि डच रोज की खेती से सालाना 72-75 लाख रूपए की आमदनी मिल रही है। बता दें कि शुभम के परिवार के पास कुल 60 बीघा जमीन है, जिसमें करीब 14 बीघा सिंचित भूमि है।

4 साल तक उत्पादन

शुभम के मुताबिक डच रोज की खेती में शुरुआती निवेश महत्वपूर्ण होता है। करीब एक एकड़ में 8 से 9 लाख रुपए तक का खर्च आता है। एक बार किए गए निवेश के बाद राजस्थान की परिस्थतियों में करीब 3 से 4 साल तक उत्पादन लिया जा सकता है। उन्होने बताया कि एक एकड़ क्षेत्र में 30 हजार पौधों की जरूरत होती है।

जल संरक्षण पर भी जोर

सिंचाई के लिए उन्होंने फार्मपौंड खुदवाया। साथ ही, भूजल वाटर रिचार्ज सिस्टम को भी अपनाया। उनका प्रयास है कि बारिश के पानी का अधिकतम उपयोग हो और भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद मिले। क्योंकि पॉलीहाउस में फूलों की फसल को नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है।

खुले खेत में भी सब्जियां

उन्होने बताया कि ने पूरी जमीन को केवल एक ही फसल तक सीमित नहीं किया है। करीब 6 बीघा जमीन में खुले खेत में टमाटर, गेंदा और कद्दू की खेती भी करता हूॅ। इससे करीब तीन माह में लगभग 6 लाख रुपए की आय मिल जाती है।

आधुनिक खेती बनी विकल्प

उन्होंने बताया कि परिजनों को प्रोत्साहित करके सभी को संरक्षित खेती से जोड़ा। इससे गांव के दूसरे किसान भी संरक्षित खेती के लिए प्रोत्साहित हुए। परिणाम रहा है कि अब गांव में विदेशी गुलाब के साथ-साथ रंगीन शिमला मिर्च, खीरा और टमाटर जैसी फसलों की खेती हो रही है। साथ ही, फसल विविधिकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

स्टोरी इनपुट: सत्यनारायण चौधरी, आईएचआईटीसी, जयपुर


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