चपरासी की नौकरी छोड़कर खेती से सालाना 7 लाख कमाई 

नई दिल्ली 29-Sep-2026 12:36 PM

चपरासी की नौकरी छोड़कर खेती से सालाना 7 लाख कमाई 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

दौलतपुरा, भीलवाड़ा। मेहनत, लगन और सीखने की ललक हो तो सीमित संसाधनों में भी खेती को फायदे का सौदा बनाया जा सकता है। किसान बद्रीलाल कुम्हार ने इसे अपनी मेहनत से यह साबित कर दिखाया है। बता दें कि बद्रीलाल अब अपनी 10 बीघा जमीन में परंपरागत फसलों, सब्जियों और मिश्रित बागवानी से सालाना 6 से 7 लाख रुपए की आमदनी ले रहे हैं। जबकि, पहले सिंचाई सुविधा के अभाव में ग्राम पंचायत में संविदा पर चपरासी का काम करते रहे। किसान बद्रीलाल ने  हलधर टाइम्स को बताया कि वे आठवीं कक्षा तक पढ़े हैं। इसके बाद पढ़ाई छोडक़र खेती के साथ ग्राम पंचायत में संविदा पर चपरासी का काम करने लगे। इस काम से उन्हें प्रतिमाह 7 हजार रुपए मिलते थे। इसी कमाई से परिवार का खर्च चलाने के साथ कुआं खुदवाने के लिए पूंजी भी जुटाते रहा। वर्ष 2015 में कुआं खुदवाने के बाद खेत में सिंचाई की सुविधा विकसित हुई। इससे पूरी 10 बीघा जमीन पर खेती करना संभव हुआ और धीरे-धीरे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार होने लगा। उन्होंने बताया कि खेती से जुड़े एक कार्यक्रम में बारानी कृषि अनुसंधान केन्द्र, आरजिया के वैज्ञानिकों से मुलाकात हुई। इसके बाद उन्होंने प्रशिक्षण लेकर उन्नत तरीकों से खेती करना शुरू किया। वर्तमान में वे कपास, मूंगफली, मक्का, मूंग, उड़द, गेहूं, चना और सरसों जैसी परंपरागत फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। इन फसलों से उन्हें सालाना करीब 3 से 4 लाख रुपए की आमदनी हो जाती है।

मिर्च-टमाटर से दो लाख की आय

खेती से आमदनी बढ़ाने के लिए बद्रीलाल ने सब्जी उत्पादन भी शुरू किया। खेत में मिर्च और टमाटर की फसल लेते हैं। इन दोनों सब्जियों से उन्हें सालाना करीब 2 लाख रुपए की आमदनी मिल रही है। परंपरागत खेती के साथ सब्जी उत्पादन अपनाने से उनकी आय के स्रोत बढ़े हैं।

मिश्रित बागवानी से अतिरिक्त कमाई

कृषि अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में बद्रीलाल ने मिश्रित बागवानी को भी अपनाया। उनके खेत में नींबू के 5, अमरूद के 22 और आम के 2 पेड़ों के साथ केले के 2 पौधे लगे हैं। इनसे भी नियमित उत्पादन मिल रहा है। बागवानी से उन्हें सालाना करीब 50 हजार रुपए की अतिरिक्त आमदनी हो रही है।

पशुधन से सहारा

उन्होने बताया कि मेरे पास पास 2 गाय, एक भैंस और एक जोड़ी बैल हैं। पशुओं से प्रतिदिन 4 से 5 लीटर दूध का उत्पादन होता है, जिसका उपयोग परिवार में ही किया जाता है। वहीं, पशुओं से प्राप्त गोबर और अन्य अपशिष्ट का उपयोग खेतों में किया जाता है। इससे खेती के लिए जैविक खाद उपलब्ध होती है और पशुधन भी खेती की व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

स्टोरी इनपुट: डॉ. केसी नागर, बारानी कृषि अनुसंधान केन्द्र, भीलवाड़ा 


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