6वीं पास किसान की बदली किस्मत, सब्जी खेती से कमाई 6 लाख रुपए

नई दिल्ली 18-Aug-2026 11:56 AM

6वीं पास किसान की बदली किस्मत, सब्जी खेती से कमाई 6 लाख रुपए

(सभी तस्वीरें- हलधर)

अरनी, भीलवाड़ा। ...हार जा चाहे जिंदगी में सबकुछ। लेकिन, जीतने की उम्मीद जिंदा रख। ऐसी ही उम्मीद के साथ सब्जी फसल का उत्पादन ले रहा है किसान कालुलाल माली। किसान कालुलाल ने बताया कि सब्जी उत्पादन से जुड़ने के बाद परिवार की आर्थिक तस्वीर बदल चुकी है। पहले जहां डेढ़ से दो लाख रुपए की आमदनी खेती से मिलती थी। वह अब खर्च निकालने के बाद 5-6 लाख रुपए तक पहुंच चुकी है। किसान कालुलाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास 20-25 बीघा जमीन है। सिंचाई के लिए कुआं है। ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं होने के चलते आजीविका के लिए मेरे पास खेती ही एक मात्र साधन है। उन्होंने बताया कि पहले परंपरागत फसलों का उत्पादन लेता रहा। लेकिन, कभी डेढ़ से दो लाख रुपए से ज्यादा आमदनी आंखो से नहीं देखी। इसके बाद आय बढ़ाने के लिए सब्जी फसलों का उत्पादन लेना शुरू किया। सब्जी फसल से बचत मिलने लगी तो थोड़ा हौसला और बढ़ा। इसके बाद साल दर साल फसल का दायरा बढ़ाने के साथ-साथ उन्नत बीजों का उपयोग करने लगा। इससे फसल पैदावार में बढ़ोत्तरी दर्ज हुई। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में गेहूं, जौ, चना, सरसों, मक्का और कपास का उत्पादन लेता हूँ। बता दें कि किसान कालुलाल 6 जमात तक पढ़े-लिखे है। लेकिन, क्षेत्र में आयोजित होने वाले कृषि कार्यक्रमों में हिस्सा लेने से सब्जी की खेती से मुनाफे का गणित निकाल लिया है। उन्होंने बताया कि विभागीय अनुदान योजनाओं का लाभ लेकर हम दोनों भाई थोड़ा-थोड़ा कर सब्जी फसल का दायरा बढ़ाते गए। साथ ही, उत्पादन तकनीक में बदलाव लाते रहे। परिणामस्वरूप लागत में कमी आने लगी। वहीं, उत्पादन में बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। सब्जी से मिले मुनाफे का असर यह हुआ कि अब वर्ष भर सब्जी फसलों का उत्पादन लेते है।

10 बीघा में सब्जी

उन्होंने बताया कि डेढ़ दशक पूर्व शुरू हुई सब्जी की खेती अब 10 बीघा रकबा अपने नाम कर चुकी है। सब्जी फसलों में मिर्च, टमाटर, भिंडी, गोभी, लहसुन, प्याज सहित दूसरी मौसमी सब्जी फसल शामिल है। उन्होंने बताया कि सब्जी फसलों से खर्च निकालने के बाद 4 लाख रुपए की शुद्ध लाख मिल जाता है।

पशुधन से आय

उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 4 गिर नस्ल की गाय है। प्रतिदिन 10-15 लीटर दुग्ध का विपणन डेयरी को कर रहा हूँ। घरेलू आवश्यकता पूर्ति के बाद शेष रहने वाले दुग्ध से घी भी बना लेता हूँ। पशुधन से प्रतिमाह 8-10 हजार रुपए की बचत मिल जाती है। पशु अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद तैयार करके उपयोग ले रहा हूँ।


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