जैविक खेती में पहले 50% नुकसान, अब सालाना 5 लाख की कमाई

नई दिल्ली 11-Aug-2026 12:43 PM

जैविक खेती में पहले 50% नुकसान, अब सालाना 5 लाख की कमाई

(सभी तस्वीरें- हलधर)

किशनपुरा, बूंदी। चार साल पहले फसल को काढ़ा पिलाना शुरू किया तो एक दम से पैदावार 50 फीसदी तक घट गई। लेकिन, जैविक उपजाने का मेरा जुनुन कम नहीं हुआ। यह कहना है किसान भीमशंकर नागर का। जो धान सहित सब्जी फसलों का उत्पादन जैविक तौर-तरीके से ले रहे है। उन्होंने बताया कि खेती से सालाना 5 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। किसान भीमशंकर ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास 20 बीघा जमीन ैहै। उन्होंने बताया कि स्नातक द्वितीय वर्ष में पढ़ाई छोडने के बाद से खेती कर रहा हॅू। 4 साल पहले तक रासायनिक खेती करता था। लेकिन, कृषि विज्ञान केन्द्र से जुडऩे के बाद जैविक की डगर पकड़ ली है। उन्होंने बताया कि जैविक के पहले साल में अधिकांश फसलों के उत्पादन में 50 फीसदी तक गिरावट आई। लेकिन, मेरा हौंसला बना रहा। उन्होंने बताया कि अब धीरे-धीरे उत्पादन स्तर में सुधार देखने को मिल रहा है। वहीं, कृषि रसायन पर होने वाला खर्च भी बच गया। खेत की मृदा में जैविक कार्बन प्रतिशत से ऊपर आ गई है। गौरतलब है कि बेहत्तर उत्पादन और मृदा को स्वस्थ रखने के लिए जैविक कार्बन की मात्रा 5 प्रतिशत के करीब होना चाहिए। लेकिन, अंधाधुंध रसायन के उपयोग से मृदा में जैविक कार्बन की मात्रा घट रही है। उपज में स्थिरता के साथ कृषि लागत में बढौत्तरी हो रही है। उन्होंने बताया कि शुरूआत में थोड़ी मुश्किल हुई। लेकिन, अब प्राकृतिक तौर-तरीकों से फसल उत्पादन की पूरी गणित समझ आ गई है। उल्लेखनीय है कि भीमशंकर गौवंश आधारित आदान जैसे वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत, पंचगव्य, वर्मी वाश, फल अपशिष्ट सूक्ष्म पोषक तत्व घोल, वानस्पतिक काड़ा का प्रयोग पौध संरक्षण कार्य में कर रहे है। इससे ना केवल कृषि आदान का खर्च घटा है। बल्कि, फसल उत्पादन के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य में भी बढौत्तरी दर्ज हुई है।

इन फसलों का उत्पादन

उन्होने बताया कि सिंचाई के लिए मेरे पास 2 ट्यूबवैल है और विद्युत बचत के लिए सौर उर्जा पंप लगा हुआ है। परम्परागत फसलों में धान, मक्का, गेहूं, चना, मूसर और लहसुन आदि फसलो का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना 5 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। 

किचन गार्डन में सब्जी

उन्होंने बताया कि मैदानी फसलों का जैविक उत्पादन लेने के बाद अब सब्जी फसलों पर ट्रायल कर रहा हॅू। सब्जी फसलों में शकरकंद, मूली, हल्दी, अरबी, मटर सहित मौसमी सब्जी फसल शामिल है। 

उन्नत पशुपालन

पशुधन में मेरे पास 2 गाय और 3 भैंस है। प्रतिदिन 20-25 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। इसमें से एक समय का दुग्ध उपभोक्ताओं को 50 रूपए प्रति लीटर की दर से बिक्री कर देता हूॅ। इससे पशुधन का खर्च निकल जाता है। वहीं, पशु अपशिष्ट से जैविक कीटनाशक और वर्मी कम्पोस्ट, वर्मी वाश तैयार करके उपयोग में ले रहा हॅू। 

स्टोरी इनपुट: डॉ. एस. राम रूण्डला, डॉ. महेश चौधरी, केवीके बूंदी।


ट्रेंडिंग ख़बरें