ढाई बीघा जमीन पर खेती का अनोखा मॉडल, किसान कमा रहे हजारों रुपये 

नई दिल्ली 24-Oct-2026 12:21 PM

ढाई बीघा जमीन पर खेती का अनोखा मॉडल, किसान कमा रहे हजारों रुपये 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

माताजी का खेड़ा, भीलवाड़ा। जीवन की सफलता को लिखने के लिए ना ब्लेक बोर्ड चाहिए और ना ही चौक। खेतों की माटी का रंग ही मेहनत का परिचय देना शुरू कर देता है। ऐसे ही किसान है भैरूलाल माली। जो फसल विविधिकरण से अपनी आय को दोगुना कर चुके है। किसान भैरूलाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि 5वीं पास करने के बाद ही पढ़ाई छोड़ दी। हम दो भाईयों के मध्य 5 बीघा जमीन का रकबा था। बड़े भाई के खेती संभालने तक फैक्ट्री में काम करता रहा। जमीन के बटंवारे तक खेतों से 30-40 हजा रूपए की आमदनी मिलती थी। इससे परिवार का गुजारा चलाना काफी मुश्किल था। इस कारण समय निकाल कर खेती भी करता रहा और फैक्ट्री में काम भी। उन्होने बताया कि समय के साथ खेती की समझ भी बढ़ी और कृषि अधिकारियों से भी सम्पर्क हुआ। इसके बाद जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ो में बांटकर फसल विविधिकरण को बढ़ावा देना शुरू किया। इससे आय बढक़र मिलने लगी। परिणाम रहा कि अब खेतों में वाणिज्य फसल, परम्परागत फसल के साथ-साथ फूल और सब्जी की खेती भी हो रही है। बता दें कि किसान भैरूलाल के पास ढ़ाई बीघा जमीन है। सिंचाई के लिए कुआं और ट्यूबवैल है। परम्परागत फसल में गेहूं -मक्का का उत्पादन लेते है। वहीं, थोड़ी जमीन मेें कपास की खेती करते है।

गेंदा-फूल के साथ सब्जी

उन्होंने बताया कि गेंदा और सब्जी फसलों की खेती मेरे लिए लाभकारी साबित हो रही है। 5-5 बिस्वा क्षेत्र में गेंदा, टमाटर, गोभी और प्याज की फसल लगाता हॅू। इन फसलों से खर्च निकालने के बाद 70-80 हजार रूपए की आमदनी मिल जाती है।  

उन्नत पशुधन

उन्होने बताया कि पशुधन में मेरे पास 4 गाय है। प्रतिदिन 10 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिलता है। घरेलू आवश्यकता पूर्ति के बाद शेष रहने वाले दुग्ध से घी तैयार कर लेता हॅू। इससे पशुधन का खर्च निकल जाता है।  वहीं, पशु अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद तैयार करके खेतों में उपयोग कर रहा हॅू।

स्टोरी इनपुट: उषा मीणा, कृषि विभाग, गुलाबपुरा 


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