60 बीघा खेती से किसान ने नर्सरी बनाकर कमाए 15 लाख सालाना
(सभी तस्वीरें- हलधर)
जालीवारा खुर्द, जोधपुर। पहले खेतों की आय से परिवार का खर्च भी नहीं निकलता था। मजबूरी में दूसरा काम करना पड़ता था। लेकिन, नर्सरी और सब्जी उत्पादन से परिवार की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है। परिवार की आर्थिकी सुधारने में काजरी जोधपुर के वैज्ञानिकों का भी सहयोग रहा है। यह कहना है किसान सुमेर सिंह कच्छावा का। जो अब खेती से सालाना 14-15 लाख रूपए की आमदनी लें रहे है। जबकि, पहले परम्परागत फसल उत्पादन से सालाना तीन से साढे तीन लाख रूपए की आमदनी मिलती थी। किसान सुमेर सिंह ने हलधर टाइम्स को बताया कि पढ़ाई पूरी करने के बाद से ही खेती से जुड़ा हॅू। उन्होंने बताया कि 12वीं तक कृषि विज्ञान विषय रहा। बाद में स्नातक करके प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट गया। लेकिन, अभी सफलता नहीं मिली है। किंतु, आधुनिक तौर-तरीके से खेती करने से अब नौकरी की कसक नहीं रही है। उन्होंने बताया कि पहले परम्परागत फसलों के उत्पादन तक सीमित रहा। लेकिन, 60 बीघा जमीन में सालाना तीन से साढ़े तीन लाख रूपए की आमदनी मिलती थी। उन्होंने बताया कि खेती में कुछ नया करने की सोच रहा था, इसी बीच आत्मा परियोजना के तहत कृषक भ्रमण में मुझे हरियाणा और गुजरात के कृषि संस्थानों में जाने का मौका मिला। वहीं, से खेती में कुछ नया करने का आईडिया मिला। बाद में काजरी के वैज्ञानिकों के सम्पर्क में आया। वहां से सब्जी पौध तैयार करने की तकनीक सीखकर नर्सरी स्थापित की। उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए मेरे पास दो कु एं और एक डिग्गी है। इससे पानी की समस्या नहीं है। जल बचत के लिए करीब 13 बीघा जमीन में ड्रिप का जाल बिछाया हुआ है। उन्होने बताया कि परम्परागत फसलों में मूंग, मोठ, बाजरा, ग्वार, तिल, गेहूं, रायड़ा, ईसबगोलं आदि फसलों का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना ढ़ाई से तीन लाख रूपए की आमदनी मिल रही है।
साढे तीन बीघा में नर्सरी
उन्होंने बताया कि सब्जी पौध तैयार करने के लिए साढे तीन बीघा क्षेत्र में नर्सरी स्थापित की हुई है। इससे मुझे आमदनी हो रही है। वहीं, क्षेत्र के किसानों को गुणवत्तापूर्ण सब्जी पौध उपलब्ध हो रही है। उन्होंने बताया कि नर्सरी में फूलगोभी, पत्तागोभी, मिर्च, बैंगन, टमाटर की सालाना दो लाख पौध तैयार करता हॅू। इससे करीब पांच लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है।
सब्जी उत्पादन से भी आय
उन्होंने बताया कि 7 बीघा जमीन में सब्जी फसलों का उन्नत तरीके से उत्पादन लेता हॅू। सब्जी फसलों में हरी पत्तेदार प्याज, गोभी, पत्तागोभी, टमाटर, मिर्च, चौलाई, लौकी का उत्पादन ले रहा हॅॅू। इन फसलों से खर्च निकालने के बाद करीब 8 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है।
उन्नत पशुपालन
पशुधन में मेरे पास 4 गाय है। इनसे प्रतिदिन 8-10 किलो दुग्ध का उत्पादन मिलता है। लेकिन, परिवार बड़ा होने से दुग्ध घर में काम आ जाता है। वहीं, शेष रहने वाले दुग्ध से घी तैयार कर लेता हूूॅ। इससे सालाना लाख से डेढ़ लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। पशु अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद तैयार करके उपयोग में ले रहा हॅू।