पुरानी खेती से नहीं मिला सुकून, सब्जियों ने बदली जिंदगी

नई दिल्ली 11-May-2026 01:03 PM

पुरानी खेती से नहीं मिला सुकून, सब्जियों ने बदली जिंदगी

(सभी तस्वीरें- हलधर)

मातामगरी, चित्तौडग़ढ। आंधियों से कोई कह दो औकात में रहें, एक तिनके ने सर उठाने की हिम्मत की है। पशुपालन के साथ सब्जी उत्पादन से घर की आर्थिक तस्वीर बदलने वाला यह किसान है बावरू मीणा। जिनके पास जमीन का रकबा भले ही कम है। लेकिन, ढ़लती उम्र में हौंसला मिसाल देने लायक है। इसी का परिणाम है कि कर्ज भी चुक रहा है और बचत भी हो रही है। गौरतलब है कि किसान बावरू मीणा खेती से सालाना 60-70 हजार रूपए की आय प्राप्त कर रहे है। किसान बाबरू मीणा ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास महज ढ़ाई बीघा जमीन है और 6वीं तक पढ़ाई की है। इसके बाद से खेती करता आ रहा हॅू। उन्होने बताया कि पहले जमीन के इस टुकड़े से परिवार का गुजारा चल जाता था। लेकिन, मंहगाई बढने के साथ परम्परागत फसलों के उत्पादन ने मुझे कर्जदार बना दिया। समय ऐसा आया कि बढते कर्ज की चिंता ने रातों की नींद छीन ली। लेकिन, कहते है भगवान होता है... कुछ ऐसा ही अनुभव मेरा रहा। केवीके से जुडऩे के बाद सब्जी उत्पादन का प्रशिक्षण लिया और खेतों में मेहनत शुरू की। परिणाम रहा कि समय के साथ कर्ज का बोझ भी कम हो रहा है और दो पैसो की बचत भी हाथ लग रही है। उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए मेरे पास कुआं है और परम्परागत फसल में मक्का, ज्वार और बाजरे का उत्पादन ले रहा हॅू। 

एक बीघा में सब्जी

उन्होंने बताया कि एक बीघा क्षेत्र में सब्जी फसलों का उत्पादन ले रहा हॅॅू। सब्जी फसल में भिंड़ी, ग्वार, चंवला, मिर्च, टमाटर की फसल शामिल है। इन फसलों से सालाना 60-70 हजार रूपए की आमदनी हो जाती है। इससे कर्ज चुकता हो रहा है। वहीं, परिवार का गुजारा चल रहा है। 

पशुधन में यह

उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास दो गाय, एक भैंस और एक जोड़ी बैल है। गाय का एक समय का दुग्ध डेयरी को बिक्री कर देता हॅू। इससे पशुधन का खर्च निकल जाता है। वहीं, पशु अपशिष्ट खेत में काम आ जाता है। 

स्टोरी इनपुट: डॉ. आरएल सोंलकी, केवीके, चितौडग़ढ़