बारिश ने बढ़ाई खजूद उत्पादकों की चिंता, पोलन का नुकसान

नई दिल्ली 21-Apr-2026 03:42 PM

बारिश ने बढ़ाई खजूद उत्पादकों की चिंता, पोलन का नुकसान

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। मौसम के बदले मिजाज ने प्रदेश के खजूर उत्पादक किसानों को चिंता में डाल रखा है। क्योंकि अप्रैल का महीना खजूर उत्पादक किसानों के लिए महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि, इस महीने के दौरान फसल में पोलन चढ़ाने का काम किसान करते है। लेकिन लगातार सक्रिय पश्चिमी विदोश से बीकानेर संभाग में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि दर्ज हो रही है। इससे किसानों को खजूर उत्पादन के साथ-साथ आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि पौधों पर पोलन को पकने के लिए 48 से 72 घंटे के शुष्क मौसम की जरूरत होती है। जबकि, मार्च और चालू महीने में आए दिन बारिश हो रही है। इस कारण पौधों पर चढ़ाया पोलन खराब होने का डर है। किसानों का कहना है कि एक बार पोलन नष्ट होने के बाद दूसरी बार पौधों पर पोलन नहीं चढ़ाया जा सकता है। क्योंकि फूल खत्म हो जाता है। इस कारण खजूर उत्पादन में बडे नुकसान की संभावना है। गौरतलब है कि पश्चिमी जिलों में खजूर का सालाना कारोबार 4-5 करोड़ के करीब है।

यहां 20-25 फीसदी खराबा

इस साल मौसम के कारण खजूर की खेती में करीब 20-25 प्रतिशत खराबा होने का अनुमान है। जिससे उत्पादन में नुकसान उठाना पड़ सकता है। बता दें कि पोलन के बाद बारिश होने पर पोलन धुल जाता है। वहीं, हवा के जरिए होने वाले पोलन भी पानी के साथ जमीन पर आ जाता है। इस कारण उत्पादन में नुकसान संभावित होता है।

किसानों को भी हुआ नुकसान

इस साल बरसात होने से खजूर फार्म के साथ किसानों को भी खजूर की खेती में नुकसान हुआ है। हालांकि, जहां बरसात नहीं हुई है। वहां खजूर की खेती को नुकसान नहीं पहुंचा है। लेकिन, बरसात ज्यादा होने वाले क्षेत्रों में खजूर की पूरी फसलों को नुकसान हो गया है। सामान्य बरसात होने के बाद मौसम में बदलाव आने पर खजूर की खेती में कोई विशेष फर्क नहीं पड़ता। लेकिन लगातार होने वाली बरसात खजूर की खेती को नुकसान पहुंचाती है।

डेजर्ट मकड़ी का करें प्रबंधन

एसकेआरएयू बीकानेर के खजूर विशेषज्ञ डॉ. राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि पोलन के बाद खजूर की खेती को शुष्क मौसम की जरूरत होती है। किसानों को फूल को बारिश से बचाने के लिए विशेष प्रयासों की जरूरत है। उन्होंने बताया कि फल बनने के दौरान इस फसल में डेजर्ट मकड़ी का प्रकोप होता है। इस कारण उत्पादन में नुकसान होता है। इस नुकसान से बचने के लिए किसान मौसम साफ रहने पर किसी भी मकड़ीनाशक का छिडक़ाव फसल पर करें