किसान खेतों को बनाएं जीती-जागती लैब
(सभी तस्वीरें- हलधर)नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत प्राकृतिक खेती का ग्लोबल हब बनने की राह पर है, और यह बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। उन्होंने किसानों को अपने अनुभवों के आधार पर प्राकृतिक खेती अपनाने और इसे विज्ञान आधारित बनाने बात भी कही। पीएम मोदी कोयंबटूर में आयोजित साउथ इंडिया नेचुरल फार्मिंग समिट के शुभारंभ कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अधिक इस्तेमाल से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हो रही है और खेती की लागत बढ़ रही है। इसका समाधान फसल विविधता और प्राकृतिक खेती में है। उन्होंने मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने, फसलों की न्यूट्रिशनल वैल्यू सुधारने और रसायन-मुक्त खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों से एक एकड़, एक सीजन प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने वैज्ञानिक और अनुसंधान संस्थानों को किसानों के खेतों को जीती-जागती लैब बनाने के लिए प्रेरित किया।
सुपरफूड की वैश्विक पहुंच
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक ही फसल की बजाय फसल विविधता अपनाना जरूरी है। दक्षिण भारत के किसान इस मामले में प्रेरणा का स्रोत रहे हैं। केरल और कर्नाटक में सीढीनुमा खेती और मिश्रित फसल मॉडल के उदाहरण स्पष्ट हैं। उन्होंने बताया कि बाजरा, रागी और अन्य पारंपरिक अनाज को प्राकृतिक खेती के साथ उगाना, किसानों के लिए आय के नए अवसर पैदा करेगा। सरकार इस सुपरफूड को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
35 हजार हैक्टयर में खेती
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन शुरू किया है, जिससे लाखों किसान जुड़ चुके हैं। अकेले तमिलनाडु में लगभग 35,000 हैक्टयर भूमि पर जैविक और प्राकृतिक खेती हो रही है। पीएम मोदी ने किसानों को पंचगव्य, जीवामृत, बीजामृत और मल्चिंग जैसी पारंपरिक विधियों को अपनाने की सलाह दी, जिससे मिट्टी की सेहत बेहतर हो और फसल की लागत कम हो