ईरान संकट का असर: दामों में उछाल, खाद होगी महंगी।
(सभी तस्वीरें- हलधर)ईरान से जुड़े तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के चलते वैश्विक स्तर पर खाद (फर्टिलाइज़र) की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। खासतौर पर में सप्लाई बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार प्रभावित हुआ है। इसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है, जो अपनी खाद जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति के चलते वर्ष 2026 में भारत का खाद सब्सिडी बिल करीब 15-20% तक बढ़ सकता है। कच्चे माल और तैयार उर्वरकों की लागत बढ़ने से सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।
किसानों को राहत: MRP नहीं बढ़ेगी
हालांकि, सरकार किसानों को महंगाई से बचाने के लिए खाद की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) को स्थिर रखने की योजना बना रही है। यानी बढ़ी हुई लागत का बोझ सीधे किसानों पर नहीं डाला जाएगा, बल्कि सरकार खुद इसे सब्सिडी के रूप में वहन करेगी। इस फैसले से किसानों को तत्काल राहत जरूर मिलेगी, लेकिन सरकारी खजाने पर अतिरिक्त भार भी पड़ेगा।
कृषि क्षेत्र पर संभावित असर
खाद की कीमतों में वैश्विक स्तर पर बढ़ोतरी का असर खेती की लागत पर पड़ सकता है। हालांकि, सरकार की सब्सिडी नीति से फिलहाल किसानों को राहत रहेगी, लेकिन लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर कृषि बजट और नीतियों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्दी सामान्य नहीं हुए, तो भारत को वैकल्पिक सप्लाई स्रोतों और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर तेजी से काम करना होगा। और यहाँ बता दे की यहाँ परर हम साडी बातो का विशेष ध्यान रखेंगे