JET काउंसलिंग कब होगी? रिजल्ट के एक महीने बाद भी तारीख नहीं तय
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। परीक्षा हुई, रिजल्ट आया और अब बारी थी कॉलेज में प्रवेश की... लेकिन, यहीं आकर विद्यार्थियों का इंतजार खत्म होने के बजाय और लंबा हो गया। यानी समस्या के अंतिम पड़ाव से ही असल समस्या पैदा हुई। बता दें कि जेट परीक्षा का परिणाम जारी हुए एक माह से अधिक समय बीत चुका है। लेकिन, काउंसलिंग की तारीख अब तक सामने नहीं आई है। इससे हजारों विद्यार्थी रोज यही सवाल पूछ रहे हैं—काउंसलिंग आखिर कब होगी? क्योंकि, मामला सिर्फ एक तारीख तय होने का नहीं है। विद्यार्थियों के भविष्य और शैक्षणिक सत्र जुड़ा है। गौरतलब है कि एसकेआरएयू बीकानेर ने 29 जुलाई को परीक्षा का परिणाम घोषित किया था। ताकि, 22 सितम्बर तक काउंसलिंग प्रक्रिया को निपटाया जा सके। लेकिन, कॉलेजों को एनओसी मामला पिछले साल के जैसे ही विद्यार्थियों के लिए द्रौपदी का चीर साबित हो रहा है। गौरतलब है कि पिछले साल भी 21 नवम्बर से काउंसलिंग फार्म भरने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो जनवरी 2026 तक चलती रही।
11 हजार सीटों पर होना है प्रवेश
प्रदेश के 51 कृषि महाविद्यालयों में करीब 11 हजार से अधिक सीटों पर प्रवेश जेट के जरिए होता है। काउंसलिंग देर से शुरू होगी तो कॉलेज आवंटन तक पहुंचने में ही एक से सवा महीने का समय लग सकता है। इसके बाद कॉलेज में प्रवेश और पढ़ाई शुरू होगी। यानी देरी का असर सीधे पूरे सेमेस्टर पर पडऩा तय है।
फिर वही कहानी!
पिछले दो वर्षों से जेट परिणाम के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया में देरी को लेकर सवाल उठ रहे है। इस बार भी स्थिति अलग नजर नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विद्यार्थियों ने परीक्षा समय पर दी और परिणाम भी जारी हो गया, तो काउंसलिंग के लिए जरूरी तैयारियां पहले से पूरी क्यों नहीं थीं? बता दें कि काउंसलिंग प्रक्रिया तत्काल पूरी नहीं होती। आवेदन, विकल्प भरने, सीट आवंटन और प्रवेश की प्रक्रिया में करीब एक से सवा महीने तक लग जाता है।
बढ़ता है मानसिक दबाव
काउंसलिंग देर से शुरू होने से सेमेस्टर को जल्दी पूरा करना होता है। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण परिवेश से आने वाले विद्यार्थियों को होती है। कम समय में थ्यौरी, प्रैक्टिकल और परीक्षा की तैयारी को लेकर विद्यार्थी प्रवेश से पूर्व ही मानसिक दवाब झेलने को मजबूर हो जाते है। अतिरिक्त मानसिक दबाव पैदा करती है।
सरकार से सीधे सवाल
आखिर क्या होती है देरी
कृषि शिक्षाविदों के मुताबिक काउंसलिंग प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय को सभी संबंधित कॉलेजों की सीटों की स्पष्ट जानकारी समय पर उपलब्ध क्यों नहीं हो पा रही है। पिछले दो वर्षों से निजी कृषि महाविद्यालयों की एनओसी को लेकर खींचतान देखने को मिल रही है। ऐसे में सवाल यह है कि प्रशासनिक प्रक्रिया की कीमत विद्यार्थी क्यों चुकाएं?
नीट जैसे आयोजन क्यों नहीं
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर होने वाली देरी का सिलसिला खत्म करने के लिए जून के बजाएं जनवरी-फरवरी माह में ही नीट के जैसे जेट परीक्षा का आयोजन किया जाना चाहिए। ताकि, सरकार को सोचने-समझने को पर्याप्त समय मिल सके और शैक्षणिक सत्र समय पर शुरू हो सके।