अब पशुशाला में एंट्री से पहले धोएंगे खुर, आई स्मार्ट मशीन

नई दिल्ली 20-Jan-2026 03:24 PM

अब पशुशाला में एंट्री से पहले धोएंगे खुर, आई स्मार्ट मशीन

(सभी तस्वीरें- हलधर)

पीयूष शर्मा

जयपुर। हाथ-पैर धोयें की नहीं...। दैनिक जीवन में स्वच्छता का संदेश देने वाली यह आवाज समय के साथ घरों में कम जरूर हुई है। परंतु, कोविड-19 के बाद से यह ध्वनि कई लोगों की आदत में शुमार हो चुकी है। ऐसा ही कुछ नजारा अब पशुशाला में देखने को मिल सकता है। हालांकि, मूक बोलेंगे तो नहीं, पर, पशुशाला में उनको प्रवेश पैर धोने के बाद ही मिलेगा। जी हां, सच यही है। पशुओं को परजीवियों से बचाने और शारीरिक-आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए पशुधन वैज्ञानिकों ऐसी मशीन का आविष्कार किया है, जिससे पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है। साथ ही, पशुशाला को भी परजीवियों के संक्रमण से बचाया जा सकता है। दरअसल, वैज्ञानिकों ने पशुओं के खुरों को बैक्टीरियां फ्री रखने के लिए सेल्फ क्लिनिंग कैटल फुटबॉथ नाम से एक मशीन तैयार की है। इस मशीन को तैयार करने का मकसद पशुओं को गंभीर बीमारियों से बचाना है। गौरतलब है कि पशुओ की अधिकांश बीमारियों के लिए खुर-मुंहपका रोग को जिम्मेदार माना जाता है। क्योंकि, मैदानी चराई के दौरान गाय-भैंस सहित दूसरे दुधारू पश्ओं के खुर-मुंह से चिपक कर बाह्य परजीवी पशुशाला तक पहुंच जाते है। वहीं, पशुशाला में साफ-सफाई के अभाव में अपनी आबादी बढ़ाकर पशुओं को बीमार करना शुरू कर देते है। इस स्थिति को देखते हुए वैज्ञानिकों ने इस मशीन का आविष्कार किया है। गौरतलब है कि इस मशीन को माधव कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. गीतम सिंह और आईवीआरआई-इज्जतनगर (उत्तरप्रदेश) की शोधार्थी डॉ. शिविका चौकसे नेे संयुक्त रूप से तैयार किया है। डॉ. गीतम सिंह ने बताया कि तैयार मशीन का भारत सरकार से पेटेंट प्राप्त हो चुका है। उन्होनेे बताया कि जल्द ही मशीन तकनीक का व्यवसायीकरण किया जायेगा। ताकि , इस रिसर्च का लाभ आम पशुपालक तक पहुंचाया जा सके। 

सालाना 20 हजार करोड़ का नुकसान

उन्होंने बताया कि अधिकांश बाह्य परजीवी पशु के खुर से चिपक कर पशुशाला में प्रवेश करते है और कई गंभीर बीमारियों के कारक बनते है। लेकिन, यह मशीन पशु खुर को बैक्टीरिया फ्री रखने का काम करेगी। इससे लंबे समय तक पशु उत्पादकता को बनाएं रखा जा सकेगा। बता दें कि वर्ष 2030 तक देश के सभी राज्यों को एफएमडी मुक्त बनाने के  लिए केन्द्र सरकार राष्ट्रव्यापी अभियान चला रही है। एक वैज्ञानिक सर्वे के मुताबिक हर साल देश को एफएमडी के कारण सालाना 20 हजार करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, देश से प्रसंस्कृत दुग्ध उत्पादों के निर्यात में यह रोग सबसे बड़ी बाधा है। 

कैसे काम करती है यह मशीन

उन्होंने बताया कि जब कोई गाय-भैंस फुटबाथ में कदम रखती है, तो सेंसर अथवा कोई व्यक्ति बटन दबाकर सफाई कार्य शुरू कर सकता है। पंप मशीन के अंदर लगे नोजल के माध्यम से कीटाणुनाशक घोल को प्रवाहित करता है, जिससे खुर धुलते और साफ होते हैं। साथ ही, कीचड़, गोबर और कीटाणु भी हट जाते हैं। उपचार के बाद, सिस्टम स्व-सफाई मोड में चला जाता है। यह गंदे तरल मलबे को फिल्टर के जरिए नाली में भेज देता है और स्वचालित रूप से नया घोल डाल देता है। यह चक्र बिना किसी अतिरिक्त मेहनत के चलता रहता है।

यह मिलेगा   

उन्होने बताया कि इस मशीन के उपयोग से कीटाणुनाशक रसायन का अपव्यय रूकेगा। साथ ही, फुट रॉट और डिजिटल डर्मेटाइटिस जैसी बीमारियों को फैलने से रोकता है। स्वचालित और स्व-सफाई डिजाइन यह सुनिश्चित करता है कि खुरों की देखभाल हमेशा सही तरीके से हो, जो पशुओं के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है और डेयरी और पशु फार्मों पर आवश्यक काम की मात्रा को कम करता है।