राजस्थान में गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन, 28 लाख एमटी की जबरदस्त बढ़त
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। प्रदेश में इस साल गेहूं और जौ का रिकॉर्ड उत्पादन होने की संभावना है। बेहत्तर मौसम के चलते इस साल प्रदेश में गेहूं और जौ की बुवाई का दायरा बढा है। इसके चलते उत्पादन में भी बढौत्तरी दर्ज हुई है। जबकि, सरसों और चना के मामले में वर्ष 2025-26 के मुकाबले उत्पादन में ज्यादा बढ़त हासिल नहीं हुई है। हालांकि, चने की बुवाई लक्ष्य से ज्यादा हुई है। जबकि, सरसों की बुवाई लक्ष्य से कम रही है। हालांकि, सरसों का उत्पादन बुवाई क्षेत्र कम होने के बावजूद पिछले रबी सीजन से थोड़ा ज्यादा रहने की उम्मीद है। गौरतलब है कि कृषि विभाग ने रबी फसलों का द्वितीय पूर्वानुमान जारी कर दिया है। इस लिहाज से कहा जा सकता है कि प्रदेश में रबी फसलों की बुवाई सम्पन्न हो चुकी है। वहीं, सरसो की नई फसल बाजार में पहुंचना शुरू हो गई है। बता दें कि इस साल सरसों बुवाई के लिए कृषि विभाग ने 36 लाख हैक्टयर का लक्ष्य रखा था। लेकिन, अक्टूबर तक चले बारिश के दौर ने सरसों को पीछे धकेल दिया। इसके चलते 34.28 लाख हैक्टयर क्षेत्र में फसल की बुवाई हो पाई। जबकि, वर्ष 2024-35 के दौरान 33.81 लाख हैक्टयर क्षेत्र में सरसो की बुवाई हो पाई थी। वहीं, उत्पादन 55.59 लाख एमटी रहा था। कृषि विभाग के पूर्वानुमान पर नजर डाले तो इस साल सरसों का उत्पादन 57.24 लाख एमटी रहने की संभावना है। इस लिहाज से सरसों उत्पादन में 1.65 लाख एमटी की बढौत्तरी दर्ज हुई है। जबकि, बुवाई क्षेत्र में महज 47 हजार हैक्टयर की बढत हासिल हुई है। हालांकि, अभी फसल उत्पादन का द्वितीय अनुमान है। इस कारण आंकड़ो में थोड़ा फेरबदल संभव है। कृषि जानकारों का कहना है कि मानसून का दौर लंबा चलने से सरसों की लक्ष्यानुरूप बुवाई नहीं हो पाई। हालांकि, बुवाई क्षेत्र और उत्पादन में दर्ज बढौत्तरी संतोषजनक है। गौरतलब है कि सरकार तिलहनी फसलों का उत्पादन बढाने पर जोर दे रही है।
इस वर्ष गेहूं की बुवाई 35.86 लाख हैक्टयर क्षेत्र में हुई है। जबकि, पिछले वर्ष 31.48 लाख हैक्टयर क्षेत्र में फसल की बुवाई हुई थी। जो पिछले वर्ष की तुलना में 4.38 लाख हैक्टयर ज्यादा है। इस लिहाज से उत्पादन में भी अच्छी बढौत्तरी देखने को मिल रही है। कृषि विभाग के मुताबिक इस साल गेहूं का उत्पादन 150.53 लाख एमटी रहने का अनुमान है। जो पिछले साल से करीब 28.19 लाख एमटी ज्यादा है। इसी तरह जौ की बुवाई भी इस साल निर्धारित लक्ष्य से 18 फीसदी से ज्यादा रही है। इस साल प्रदेश में 4.98 लाख हैक्टयर क्षेत्र में जौ की बुवाई दर्ज हुई है। जबकि, पिछले साल 4.06 लाख हैक्टयर क्षेत्र में फसल की बुवाई हुई थी। इससे उत्पादन का आंकड़ा 15.66 लाख एमटी रहने की संभावना है। जबकि, गत वर्ष 14.37 लाख एमटी उत्पादन रहा था। इससे कहा जा सकता है कि इस साल जौ उत्पादन में करीब 1.28 लाख एमटी की रिकॉर्ड बढौत्तरी दर्ज हुई है।
गेहू-जौ-चना बुवाई रकबा बताता है कि इस बार मौसम के चक्रव्यूह में फंसने से किसान सरसों की समय पर बुवाई नहीं कर पाएं। शायद यही कारण रहा है प्रदेश में गेहूं, जौ और चना फसल का बुवाई क्षेत्र अधिक रहा। वहीं, उत्पादन के साथ-साथ उत्पादकता में भी सुधार देखने को मिला।

(उत्पादन लाख एमटी और उत्पादकता किग्रा प्रति हैक्टयर में)