जूट उद्योग पर 'सर्जिकल स्ट्राइक': जमाखोरी रोकने के लिए सरकार के सख्त नियम लागू
जूट उद्योग पर 'सर्जिकल स्ट्राइक': जमाखोरी रोकने के लिए सरकार के सख्त नियम लागू
(सभी तस्वीरें- हलधर)बीते कई महीनों से कच्चे जूट की आसमान छूती कीमतों और बाजार में इसकी कमी बनी हुई है। यह स्तर 2025-26 के MSP से भी काफी ऊपर चल रहे हैं। इस तेजी ने जूट उद्योग की लागत बढ़ा दी है और मिलों के लिए कच्चे माल की उपलब्धता चुनौती बन गई है। जिसको देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है, जिसका सीधा मकसद बाजार में जूट की सप्लाई बढ़ाना और कीमतों को काबू में करना है।
व्यापारियों के लिए 'नो स्टॉक' पॉलिसी
केंद्र सरकार ने जूट के ट्रेडर्स और बेलर्स के लिए स्टॉक लिमिट को शून्य कर दिया है। अब वे अपने पास जूट जमा करके नहीं रख पाएंगे। जिनके पास स्टॉक है, उन्हें 5 मई 2026 तक उसे बेचना होगा। बेचे गए माल की फिजिकल डिलीवरी 15 मई 2026 तक हर हाल में पूरी करनी होगी।
मिलों को थोड़ी राहत, लेकिन कड़ी नजर
जूट मिलों और प्रोसेसिंग यूनिट्स का काम न रुके, इसके लिए उन्हें थोड़ी छूट दी गई है। जिसमें वे अपनी क्षमता के अनुसार अधिकतम 45 दिनों का स्टॉक रख सकती हैं। साथ ही, हर 15 दिन में Jute SMART पोर्टल पर स्टॉक की सटीक जानकारी अपडेट करना अनिवार्य है।
नियम तोड़ा तो खैर नहीं
अगर कोई भी इकाई तय सीमा से ज्यादा जूट रखती है या गलत जानकारी देती है, तो आवश्यक वस्तु अधिनियम (1955) के तहत सख्त एक्शन लिया जाएगा। जिसमें धारा 6 के अंतर्गत स्टॉक जब्त कर लिया जाएगा, धारा 7 के तहत नियम उल्लंघन पर सजा का प्रावधान और धारा 9 के तहत गलत डेटा देने पर दंड का प्रावधान शामिल है।