किसान को फायदा या राजस्व का चुना, क्या है ग्राम 2026 का असली प्लान?

नई दिल्ली 13-Apr-2026 06:55 PM

किसान को फायदा या राजस्व का चुना, क्या है ग्राम 2026 का असली प्लान?

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। हुआ है और हुआ कुछ भी नहीं। जी हां, राजनीति का सच यही है। हर बार लाखों करोड़ो रूपए निवेश के दावे किए जाते है। लेकिन, धरातल निवेश को निगल जाता है। मामला है राजस्थान ग्लोबल एग्रीटेक मीट का। राज्य सरकार मई 2026 में इस ग्राम का आयोजन करने जा रही है। शासन प्रशासन के स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी है। ग्राम लोगो, ब्रोशन और वेबसाइट का विमोचन भी हो चुका है। लेकिन इस बार भी फिक्की के साथ मिलकर कहीं पहले जैसे ही घोटालों की पटकथा को नहीं लिखी जा रही है? क्योंकि, वर्ष 2016-17 के दौरान जयपुर, उदयपुर और कोटा में आयोजित ग्राम में कृषि विभाग की मशीनरी, स्टेशनरी को फिक्की के जिम्मेदारों ने बखूबी उपयोग किया और सरकार को राजस्व का चूना लगाया था। एक कूलर का प्रतिदिन का किराया दस हजार और एक कुर्सी का किराया दो हजार रूपए प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि ग्राम आयोजन से किसानों को क्या फायदा मिला और कितना निवेश राजस्थान में आया? क्योंकि, ग्राम ऐसा आयोजन है, जिसके आयोजन पर करोड़ो रूपए पानी के जैसे बहाएं जाते है। लेकिन, हाथ में निवेश की जगह झुंझुना दिखाई पड़ता है। मजेदार बात यह है कि वर्ष 2016-17 के दौरान आयोजित ग्राम का लेखा-जोखा सरकार ने दशक बाद भी सार्वजनिक नहीं किया है और ना ही ग्राम के दौरान हुए एमओयू से प्रदेश में कितना निवेश आया, इस बात का खुलासा किया है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है। फिक्की पर भी और सरकार पर भी। क्योंकि, इस आयोजन में मामला कृषि विभाग तक सीमित नहीं है। पशुपालन, सहकारिता, ग्रामीण विकास के साथ-साथ आईसीएआर संस्थान और कृषि विश्वविद्यालय के संसाधनों का समुचित रूप से दोहन किया जाता है। 

तो बदल जाती तस्वीर

सूत्रों ने बताया कि जयपुर, कोटा और उदयपुर में आयोजित ग्राम के दौरान लाखों करोड़ो रूपए के एमओयू सरकार और कम्पनियों के मध्य हुए थे। लेकिन, दशक बाद भी यह निवेश मरूधरा में देखने पर भी नजर नहीं आ रहा है। गौरतलब है कि पिछले ग्राम में ड्रिप, सोलर, मंड़ी डिजीटलीकरण , वेयरहाउस, प्रसंस्करण, ग्रेडिग़ पैकिंग, कृषि उद्योगों को लेकर करीब 6500-7000 करोड़ रूपए के एमओयू हस्ताक्षर हुए थे। लेकिन, यह एमओयू वाह-वाही तक सिमट कर रह गया। अगर यह निवेश धरातल लेता तो प्रदेश का कृषि परिदृश्य और किसानों के साथ-साथ मरूधरा की तस्वीर बदल जाती। 

40 फीसदी भी धरातल पर नहीं

सूत्रों ने बताया कि 6500-7000 का निवेश ग्राम 2016-17 के मध्य हस्ताक्षर हुए। लेकिन, इन एमओयू में से ड्रिप, सोलर, कृषि मंड़ी डिजीटलीकरण से जुड़े एमओयू ही धरातल ले पाएं। लेकिन, शत प्रतिशत लक्ष्य से दूर रहे। इन क्षेत्र में करीब 85 फीसदी एमओयू ही पूरे हो पाएं। इसी तरह वेयरहाउसिंग के क्षेत्र में 60-55 और कृषि नवाचार में 70-75 फीसदी ही काम हो पाया। रही बात निजी क्षेत्र निवेश की तो लक्ष्य से कथित तौर पर 40 फीसदी भी हासिल नहीं हो पाया। 

एक नजर एमओयू

  • जयपुर ग्राम-4400 करोड़
  • उदयपुर ग्राम-1200 करोड़
  • कोटा ग्राम-1000 करोड़

भ्रष्टाचार की बू

गौरतलब है कि वर्ष 2016-17 के ग्राम में फिक्की के साथ-साथ कृषि अधिकारियों को चांदी कूटने का भरपूर मौका मिला था। एक जम्बो कूलर 15 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से किराए पर लिया गया। वहीं, एक कुर्सी का किराया 2 हजार रूपए तक चुकाया गया। इसी तरह कालीन, मशीनरी और स्टेशनरी में भी जमकर पैसा कमाया गया। ऐसे में ग्राम की क्यों, किस लिए और किसके लिए आयोजित हो रहा है आसानी से समझा जा सकता है। 

जमीन हथियाने का खेल तो नहीं

सूत्रों ने बताया कि पिछले ग्राम के दौरान अधिकांश एमओयू प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से धरातल नहीं ले पाई। क्योंकि, अधिकांश कंपनियां सरकार से रियायती दर पर भूमि उपलैध कराने की मांग कर रही थी। कहीं ऐसा इस बार तो नहीं हो रहा है। इस बारे में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीना को संज्ञान लेना जरूरी हो जाता है।


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