पशुपालकों के लिए चेतावनी, तारबंदी से फैल रही जानलेवा बीमारी

नई दिल्ली 05-Jan-2026 05:49 PM

पशुपालकों के लिए चेतावनी, तारबंदी से फैल रही जानलेवा बीमारी

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। गाय-भैंस के दिल को छेद रहा है चारा...। शीर्षक पढक़र चौकिएं मत। क्योंकि, सच यही है। सूखा और हरा चारा पशु जीवन और बेहत्तर दुग्ध उत्पादन के लिए जरूरी है। लेकिन, समय के साथ-साथ यह चारा अब जानलेवा साबित होने लगा है। खेतो की तारबंदी होने के बाद से साल दर साल स्थिति भयावह होती नजर आ रही है। यदि समय रहते पशुपालकों ने चारा प्रबंधन पर ध्यान नहीं दिया तो यह स्थिति पशुपालन के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। क्योंकि, टीपी (अभिघातज पेरीकार्डिटिस) के मामले में पशु की मौत संभव है। गौरतलब है कि गाय-भैंस जैसे दुधारू पशु सूखे और हरे चारे के साथ आयरन के तार निगल रहे है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि खेत में तारबंदी से यह समस्या बढ़ी है। खेतों की तारबंदी से पहले साल भर में 5 से 10 मामले सामने आते थे। लेकिन, पश्चिमी राजस्थान में अधिकांश पशु इस स्थिति से जूझते नजर आ रहे है। गौरतलब है कि जंगली सकूर, छुट्टा पशु और नीलगाय से फसली नुकसान को रोकने के लिए किसान खेतों की तारबंदी कर रहे है। खेतो की तारबाड़ के लिए कांटेदार तारों का उपयोग किया जाता है। यहां तक स्थिति ठीक है। लेकिन, पशु के जीवन से खेल इसके बाद शुरू होता है। पशु शल्य चिकित्सक डॉ. राकेश पूनियां ने बताया कि मानसून के बाद ऐसे मामलों में बढौत्तरी देखने को मिलती है। क्योंकि, मैदानी चराई के दौरान पशु हरे चारे के साथ तार के टुकड़े भी निगल जाते है। वहीं, खेत-खलिहान में फसल गहाई से भंड़ारण तक सूखे चारे में तार के टुकडे शामिल होने लगे है। यह स्थिति पशुओं के लिए जानलेवा साबित होने लगी है।

ऐसे समझे नुकसान

उन्होंने बताया कि चारे के साथ आयरन तार के टुकड़े गाय-भैंस के रूमेन में चले जाते है। रूमेन में तार या नुकीली वस्तु चले जाने से नुकसान ज्यादा नहीं है। लेकिन, रूमेन से यह टुकडे रेटिकुलम में जाने के बाद फस जाते है। क्योंकि, रेटिकुलम की संरचना मधुमक्खी के छत्ते जैसे होती है। इस कारण यही अटके रह जाते है। उन्होने बताया कि रेटिकुलम के पास डायफ्राम होता है। गौरतलब है कि वक्ष गुहा और उदर गुहा शरीर का महत्वपूर्ण अंग है। उन्होंने बताया कि रेटिकुलम से यदि तार के टुकडे हृ्दय के पास चला जाता है तो दिल की धडक़न रूकने का खतरा पैदा हो जाता है।

ऑपरेशन में बचने की 70 फीसद संभावना

उन्होनें बताया कि डॉयफ्राम से तार के टुकड़े निकालने के लिए पशु का ऑपरेशन किया जाता है। लेकिन, इसमें भी पशु के बचने की 70 फीसदी संभावना रहती है। उन्होंने बताया कि गाय-भैंस गर्भित होने की दशा में स्थिति और पेचीदा हो जाती है। गौरतलब है कि डायफ्राम का भी दो बार ऑपरेशन किया जाता है। क्योंकि, तार के टुकडे डायफ्राम रेक्टिक हार्निया को फाडने का काम करते है। इसे आम भाषा में पशु को पेट फटना भी कहा जाता है।

यह करें किसान

उन्होनें बताया कि पशु को इस स्थिति से बचाने के लिए पशुपालक सूखा और हरा चारा देते समय जागरूकता दिखाएं। पशु की ठान में चुबंक का उपयोग करें। ताकि, लोह निर्मित वस्तुएं चुबंक के सम्पर्क में आ जाएं। इसके बाद पशु को चारा खिलाएं। वहीं, खेत-खलिहान में पुरानी तारबाड़ अथवा टूटे हुए तारों का चाराई स्थल से दूर रखें।


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