सेक्स सॉर्टेड सीमन योजना में चौंकाने वाले परिणाम पैदा हो रहे फीमेल की जगह मेल

नई दिल्ली 27-Apr-2026 05:09 PM

सेक्स सॉर्टेड सीमन योजना में चौंकाने वाले परिणाम पैदा हो रहे फीमेल की जगह मेल

(सभी तस्वीरें- हलधर)

पीयूष शर्मा

जयपुर। आय बढौत्तरी और नर गौवंश की समस्या से पशुपालकों को निजात दिलाने के उद्धेश्य से प्रदेश में लागू की गई सेक्स सोर्टेड सीमन तकनीक समय के साथ फेल होती नजर आ रही है। क्योंकि, फीमेल (मादा) की जगह मेल (नर) बछड़े पैदा हो रहे है। इससे सरकार की समूची योजना से पशुपालकों का विश्वास उठता जा रहा है। गौरतलब है कि एआई के बाद नर बछड़े पैदा होने का मुद्दा पशुपालन विभाग की राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक में भी उठ चुका है। वहीं, पिछले दिनों ही विभाग के निदेशक ने एक पत्र जारी कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए है। बता दें कि बजट घोषणा के तहत प्रदेश में सेक्स सोर्टेड सीमन योजना शुरू की गई है। योजना को धरातल देने के लिए पशुधन विकास बोर्ड, आरसीड़ीएफ और एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज के मध्य 10 साल के लिए त्रिपक्षीय समझौता हुआ हैं। इस समझौते के तहत बस्सी में सीमेन स्टेशन स्थापना और प्रबंधन शामिल है। इस स्टेशन से हर साल लगभग 10 लाख सेक्स-सॉर्टेड सीमेन डोज का उत्पादन होना है। मूल्य निर्धारण में सेक्स-सॉर्टेड सीमेन 239 रुपए प्रति डोज, स्वदेशी पारंपरिक सीमेन 22 रुपए और आयातित नस्ल 30 रुपए प्रति डोज तय किया गया है। यहां तक सब ठीक है। सूत्रों ने बताया कि जिन पशुपालकों ने बछिया पाने के लिए अपने पशुधन की एआई करवाई है, उनके यहां बछिया की जगह बछड़े पैदा हो रहे है। सूत्रों ने बताया कि नागौर जिले की एक लिस्ट पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। जिसमें पशुपालकों के मय नाम पते बछड़े पैदा होने की जानकारी दी गई है। ऐसे में सीमन डोज की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़ा हो चुका हैं। सूत्रों ने बताया कि प्रदेश में सीमन डोज की जांच तक नहीं की जा रही है। शायद यही कारण है कि योजना से लाभान्वित होने वाले पशुपालकों के साथ बछिया के नाम पर धोख हो रहा है। 

गुणवत्ता मानकों पर सवाल

सीमन स्ट्रॉ की गुणवत्ता सीधे तौर पर शुक्राणुओं की जीवित रहने की क्षमता और उनकी गतिशीलता पर निर्भर करती है। यदि स्ट्रॉ की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है, तो निषेचन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती।

गुणवत्ता घटने के तकनीकी कारण 

  • शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता : एक मानक सीमन स्ट्रॉ में जमने से पहले और पिघलाने के बाद शुक्राणुओं की एक निश्चित संख्या होनी चाहिए। 
  • गतिशीलता: यदि स्ट्रॉ में शुक्राणु एक सीधी दिशा में तेजी से नहीं बढ़ रहे हैं, तो वे गर्भाशय से होते हुए फैलोपियन ट्यूब तक नहीं पहुँच पाएंगे। गुणवत्ता खराब होने पर इनकी गति कम अथवा सर्कुलर हो जाती है।
  • मृत शुक्राण: यदि स्ट्रॉ में जीवित शुक्राणुओं की संख्या 40 प्रतिशत से कम है, तो गर्भधारण की संभावना न के बराबर हो जाती है।

 कोल्ड चेन का टूटना:

  • सीमन स्ट्रॉ को -196डिग्री सेटीग्रेंड पर लिक्विड नाइट्रोजन (एलएन2) में रखा जाता है। गुणवत्ता गिरने का सबसे बड़ा कारण यहीं होता है।
  • तापमान में उतार-चढ़ाव: यदि क्रायोकैन से स्ट्रॉ को बार-बार बाहर निकाला जाए अथवा नाइट्रोजन का स्तर कम हो जाए, तो शुक्राणुओं की कोशिका झिल्ली फट जाती है। इसे थर्मल शॉक कहते हैं।
  • अधूरी फ्रोजन प्रक्रिया: यदि सीमन को फ्रीज करते समय ग्लिसरॉल की मात्रा सही न हो या फ्रीजिंग की दर सही न हो, तो स्ट्रॉ के अंदर बर्फ के क्रिस्टल बन जाते हैं जो शुक्राणुओं को काट देते हैं।

सीमन का दूषित होना 

  • सूक्ष्मजीवी संक्रमण: यदि सीमन निकालते समय या पैक करते समय स्वच्छता नहीं रखी गई, तो स्ट्रॉ में बैक्टीरिया हो सकते हैं। यह पशु के गर्भाशय में जाकर संक्रमण पैदा कर देते हैं, जिससे भूण टिक नहीं पाता।

स्ट्रॉ की पैकेजिंग और सीलिंग

  • लीकेज: यदि स्ट्रॉ की फैक्ट्री सीलिंग कमजोर है, तो लिक्विड नाइट्रोजन स्ट्रॉ के अंदर घुस सकती है। थॉइंग के समय ऐसी स्ट्रॉ फट जाती है अथवा नाइट्रोजन शक्राणुओं के लिए जहरीली साबित होती है।
  • पुराना स्टॉक: बहुत अधिक समय तक स्टोर किए गए सीमन की उर्वरता क्षमता  धीरे-धीरे कम होने लगती है, खासकर अगर स्टोरेज की स्थिति आदर्श न हो।

ऐसे होती है गुणवत्ता की पहचान 

  • रंग और प्रिंट: स्ट्रॉ पर छपे कोड, सांड का नंबर और बैच स्पष्ट होना चाहिए।
  • थॉइंग व्यवहार:  पानी में डालने पर यदि स्ट्रॉ के अंदर बुलबुले दिखें या वह फटने लगे, तो उसकी गुणवत्ता खराब हो चुकी है।
  • माइक्रोस्कोप जांच: सबसे सटीक तरीका लैब में माइक्रोस्कोप के नीचे पीटीएम की जांच करना है।

लक्ष्य में भी पिछड़ापन

पशुपालन विभाग के निदेशक द्वारा जारी पत्र के मुताबिक सेक्स सोर्टैड सीमन योजना के तहत प्रदेश में 2.19 लाख डोज का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन, अब तक 1.36 लाख डोज का ही उपयोग हो पाया है। वहीं, एआई किए गए पशुओं में से केवल 21 हजार 950 पशुओं का ही गर्भ परीक्षण हो पाया है। 

फीमेल से ज्यादा मेल

कुचामन पशुपालन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक सेक्स सोर्टेड सीमन योजना के तहत जिन पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान किया गया था, उनसे फीमेल से ज्यादा मेल पैदा हुए है। कुल 93 पशुपालकों के पशुओं का एआई किया गया। जिसमें 55 बछड़े और 38 बछिया ने जन्म लिया है।


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