माटी को पोषण तभी घर होगा रोशन
(सभी तस्वीरें- हलधर)पोषक तत्व प्रबंधन पर ध्यान दें किसान
पीयूष शर्मा
जयपुर। घर को रोशन करना है तो माटी का पोषण करना है। जी हां, सच यही है। बिना पोषण के माटी आपके घर खुशियों के दिए नहीं झिलमिलाएगी। यह चौकाने वाला खुलासा हुआ है भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान, भरतपुर की एक अध्ययन रिपोर्ट में। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरसों फसल के बेहत्तर उत्पादन के लिए किसानों को मुख्य पोषक तत्व एनपीके के साथ-साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति पर भी ध्यान देने की जरूरत है। गौरतलब है कि रबी के दौरान बारानी क्षेत्र में सरसों की जमकर बुवाई होती है। किसान जमीन में बीज डालने के बाद फसल पर ज्यादा ध्यान नहीं देते है। शायद यही कारण है कि राजस्थान को पीत प्रदेश बनाने का सपना अब भी अधूरा है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 36-38 लाख हैक्टयर क्षेत्रफल में सरसो की बुवाई होती है। लेकिन, उत्पादकता बढाना अब भी चुनौति बना हुआ है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि सरसों फसल की उत्पादकता बढाने के लिए किसानों को पोषक तत्व प्रबंधन पर ध्यान देने की जरूरत है। फसल को रामभरोसे छोडना सही नहीं है। क्योंकि, रबी में सरसो ही ऐसी फसल है जो कम सिंचाई और कम लागत में तैयार होती है। इसके बावजूद भी किसान फसल में पोषक तत्वों की पूर्ति नहीं करते है। ऐसे में पौधा अपनी खुराक माटी से ग्रहण करता है। इससे माटी में पोषक तत्वों की कमी होना स्वभाविक है। हालात यह है कि फसलोत्पादन के वर्तमान स्तर पर मृदा से लगभग 36 मिलियन टन पोषक तत्वों (एन.पी.के.) का दोहन प्रतिवर्ष हो रहा है, जो चालू वर्ष में बढकर 45 मिलियन टन होने की संभावना है।
जबकि, रासायनिक उर्वरको से पोषक तत्वों की आपूर्ति 28 मिलियन टन प्रतिवर्ष है। इस प्रकार मृदा से प्रतिवर्ष 8-10 मिलियन टन पोषक तत्वों का ह्यस हो रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन किसानों के मृदा स्वास्थ्य कार्ड बन चुके है, वह भी वैज्ञानिक सिफारिश के आधार पर उर्वरकों का उपयोग नहीं कर रहे है। इस कारण खाई बढ़ती जा रही है।
फसलों में नुकसान ऐसे
नाइट्रोजन की कमी होने से पौधों की पत्तियां पीली पडऩे लगती हैं। लचक कम होने के साथ कडी और छोटी हो जाती हैं। इस कारण हल्के से भी तनाव के कारण वह आसानी से टूटकर गिर जाती हैं। वहीं फास्फोरस की कमी से पौधे की पत्ती गहरे हरे रंग की संकरी होने के साथ कठोर हो जाती है। फसल के सिरे का रंग भी बैंगनी हो जाता है। साथ ही प्रकाश संश्लेषण की क्रिया धीमी पडऩे लगती है और पौधों का विकास रूक जाता है।
आदर्श उपयोग अब तक नहीं
देश में कृषि उत्पादन की वर्तमान स्थिति वैज्ञानिकों और किसानों के लिए चुनौती भरी है। क्योंकि, जनसंख्या के मामले में भारत दुनिया में सिरमौर बन चुका है। खाद्यान्न की मांग बढ़ती जा रही है। लेकिन, कृषि के मूलभूत संसाधन समय के साथ घटते जा रहे है। ऐसे में, मृदा की उर्वरता को बचाना बड़ी चुनौति बन चुका है। मृदा वैज्ञानिकों का कहना है कि किसान मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक सिफारिश के अनुसार खाद और उर्वरको का उपयोग नही कर रहे हैै। जिसके कारण असंतुलित उर्वरक उपयोग हो रहा है। अभियान चलाने के बाद भी नत्रजन, फास्फोरस और पोटाश 4:2:1 का आदर्श उपयोग अनुपात अब तक नही हो पा रहा है।
17 पोषक तत्व जरूरी
पौधों को एक स्वस्थ जीवन पूरा करने के लिए 17 पोषक तत्वों की जरूरत होती है। यदि इसमें से किसी एक पोषक तत्व का भी कमी हो जाये तो पौधे अपनी पूरी क्षमता से उपज नहीं दे पाते हैं। पौधे कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को वायु और जल से प्राप्त कर लेते हैं। शेष 14 पोशक तत्वों को पौधे भूमि से जडो द्वारा ग्रहण करते हैं। भूमि में पोशक तत्वों की कमी होने पर उनकी आपूर्ति खाद और उर्वरको द्वारा की जाती है ।
ऐसे बढेगा सरसों उत्पादन
उर्वरकों से सरसों उत्पादन में वृद्धि तभी संभव है, जब मिट्टी जाँच के आधार पर इनका समुचित मात्रा में प्रयोग किया जाए। सामान्यतया, नत्रजन, फ ॉस्फोरस, पोटाश, सल्फ र, जिंक और बोरोन सरसों फसल केलिए उर्वरकों से दिये जाने वाले प्रमुख पोषक तत्व हैं। इनमें से नत्रजन, फॉस्फ ोरस और पोटाश की पौधों को अधिक आवश्यकता होती है और वे मुख्य पोषक तत्व कहलाते हैं। सल्फ र द्वितीय पोषक तत्व है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सरसों उत्पादन में विभिन्न सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इनकी पौधों को बहुत कम मात्रा में आवश्यकता होती है। इनमें जिंक, बोरोन और आयरन जैसे सूूक्ष्म पोषक तत्व शामिल है। इन पोषक तत्वों की कमी से अनेक क्षेत्रो में सरसों की पैदावार प्रभावित हो रही है ।
क्यों जरूरी है माटी को पोषण
सरसों अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार शर्मा ेने बताया कि अनुसंधान से पता चला है कि एक टन सरसों की पैदावार होने पर 64.5 किग्रा. नत्रजन, 20.6 किग्रा.फ ास्फ ोरस, 53.4 किग्रा. पोटाश, 16.0 किग्रा. गन्धक (सल्फर), 56.5 किग्रा. कैल्सियम, 9.5 किग्रा. मैंग्नीशियम, 0.068 किग्रा. जिंक, 0.63 किग्रा. लोहा, 0.2 किग्रा. मैंग्नीज और 0.02 किग्रा. ताँबा का अवशोषण होता है।