12 रुपये यूनिट बिजली से संकट में झींगापालन, 20 लाख तक घाटा

नई दिल्ली 06-Jan-2026 12:51 PM

12 रुपये यूनिट बिजली से संकट में झींगापालन, 20 लाख तक घाटा

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। राज्य सरकार के स्तर पर आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की तैयारियां शुरू हो चुकी है। लेकिन, अब भी सरकार ने झींगापालकों की परेशानी की ओर ध्यान नहीं दिया है। गौरतलब है कि हरियाणा और आंध्रप्रदेश में झींगापालकों का वहां की सरकार कृषि कनेक्शन दर पर बिजली उपलब्ध करवा रही है। लेकिन, यहां किसानों को 12 रूपए प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली का बिल भरना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि झींगापालन को कृषि का दर्जा देने के लिए हर साल बजट पूर्व सरकार से राहत देने की गुहार लगाते है, मुख्यमंत्री, वित्तमंत्री, पशुपालन मंत्री को ज्ञापन भेजते है। लेकिन, राहत का इंतजार अब भी बना हुआ है। बता दें कि चूरू जिले के उन इलाकों में, जहां पानी अत्यधिक खारा है और परंपरागत खेती करना मुश्किल है। ऐसे में किसानों ने झींगा पालन को आजीविका का विकल्प बनाया है। यह उनके लिए आय का अच्छा जरिया बन रहा है, लेकिन अब महंगी बिजली ने उनकी परेशानियां बढ़ा दी हैं। यहां बिजली की दरें 12 रुपए प्रति यूनिट तक पहुंच गई हैं।

50 फीसदी बिजली खर्च

झींगा पालन में बिजली का खर्च कुल लागत का करीब 50 प्रतिशत होता है, क्योंकि तीन माह की अवधि के दौरान पानी में पर्याप्त ऑक्सीजन बनाए रखने के लिए लगातार पंप चलाने पड़ते हैं। हरियाणा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में झींगा पालन को कृषि गतिविधि माना जाता है, इसलिए वहां किसानों को सस्ती बिजली मिलती है। वहीं राजस्थान में इसे खेती नहीं, बल्कि व्यावसायिक गतिविधि माना जाता है, जिस कारण यहां सबसे महंगी बिजली दरें लागू की जा रही हैं।

15-20 लाख का घाटा

उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में इस तरह की गतिविधियों के लिए अलग और सस्ती बिजली दरें तय की गई हैं। इस समस्या को वे विभागों के समक्ष उठा चुके हैं और आगे भी उठाते रहेंगे। महंगे जुर्माने और बिजली कनेक्शन काटे जाने से कुछ किसान अदालत का सहारा ले चुके हैं। यदि फसल नष्ट हो जाती है तो 15-20 लाख रुपए तक का निवेश डूब जाता है। मजबूरी में कई किसानों ने जुर्माना भर दिया है। जबकि , अन्य सरकार से राहत की मांग कर रहे हैं।


ट्रेंडिंग ख़बरें