थार का अनार: 22 अरब का कारोबार, फिर भी किसान बेहाल

नई दिल्ली 27-Jan-2026 05:00 PM

थार का अनार: 22 अरब का कारोबार, फिर भी किसान बेहाल

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। कृषि मंत्री जी, सवाईमाधोपुर के अमरूद किसानों के जैसा ही बसंती अहसास थार में अनार को आकार देने वालों को भी करवा दीजिए ना। क्योंकि, पश्चिमी राजस्थान में अनार का क्षेत्रफल प्रदेश की सभी बागवानी फसलों को पीछे छोड़ चुका है। वहीं, कारोबार भी हर साल बढ रहा है। लेकिन, फिर भी, रिसर्च और प्रोसेेसिंग की कमी किसानों को खल रही है। क्योंकि, अनार पर रिसर्च बाड़मेर से साढे पांच सौ किलोमीटर दूर हो रहा है। वहीं, प्रोसेसिंग की कोई सुगबुगाहट  ही नहीं है। माजरा, अमरूद जैसा ही साफ है। अनार किसानों को बीमार करें, सरकार स्तर पर कुछ कीजिए ना। गौरतलब है कि पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर, जालौर, जोधपुर, नागौर, सिरोही सहित कई जिलों में अनार फसल के बढते दायरे और मौसम में आ रहे बदलाव को देखते हुए प्रोसेसिंग के साथ-साथ रिसर्च के लिए क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र का मांग जोर पकडऩे लगी है। किसानों का कहना है कि अनार फसल को बचाने के लिए स्थानीय स्तर पर रिसर्च स्टेशन होना जरूरी है। क्योंकि, बदलते ऋतु चक्र और बगीचों की सघनता से से अनार  फसल में कीट-रोग का प्रकोप पहले से काफी बढ़ चुका है। वहीं, अनार उत्पादन में हुई बढौत्तरी से विपणन की समस्या भी किसानों की चिंता बढ़ा रही है। किसानों को कहना है कि छोटे आकार के फलों का कोई मौल-भाव करने वाला नहीं है। गुजरात-महाराष्ट्र सहित दूसरे राज्यों से आने वाले व्यापारी ऐसे फलो की खरीद नहीं करते है। ऐसे में लोकल कारोबारी मनमाने दाम पर उपज की खरीद करते है। ऐसे में कहा जा सकता है कि थार का अनार अब प्रोसेसिंग के साथ-साथ रिसर्च स्टेशन भी मांग रहा है। 

40 हजार हैक्टयर में अनार

कृषि विशेषज्ञों की माने तो समय के साथ बाड़मेर-बालोतरा से निकलकर अनार की खेती कई जिलों के किसानों की जीवनरेखा बन चुका है। कृषि विशेषज्ञो की माने तो प्रदेश में 40 हजार हैक्टयर क्षेत्र में अनार की खेती होने लगी है। जिसमें बाड़मेर-बालोतरा जिले में 16 हजार हैक्टयर क्षेत्र में अनार की बागवानी कर रहे है। 

यह है परेशानी

अनार उत्पादक किसान कल्लाराम चौधरी, हस्तीमल राजपुरोहित, नरपतसिंह चारण, ओम सिंह राठौड़ ने बताया कि सरकार ने अनार का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बस्सी जयपुर में स्थापित किया है। जबकि, फसल यहां पैदा हो रही है। ऐसे में इस सेंटर का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। साल में एक-दो कार्यशाला इस सेंटर के द्वारा बाड़मेर जिले में करवा दी जाती है। वहीं, आईसीएआर का अनार अनुसंधान केन्द्र, सोलापुर (महाराष्ट्र) में है। जो बाड़मेर से करीब 1300 किलोमीटर दूर है। ऐसे में प्रत्येक किसान का वहां पहुंचना काफी मुश्किल और खर्चीला है। ऐसे मेें सरकार को स्थानीय स्तर पर ही अनार रिसर्च स्टेशन खोलने की जरूरत है। ताकि, किसानों को अपनी समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही मिल सके। 

विशेषज्ञों की कमी

प्रदेश अनार की खेती का श्री गणेश हुए दो दशक से ज्यादा का समय हो चुका है। इसके बावजूद अनार विशेषज्ञों की कमी किसानों पर भारी पड रही है। सरकार का उद्यान विभाग अपने हाल है। वहीं, कृषि विज्ञान केन्द्र भी इस फसल को लेकर ज्यादा विशेषज्ञता नहीं रखते है। यही कारण है कि महाराष्ट्र और गुजरात के झोलाझाप एक्सपर्ट के रूप में किसानों से मनमाने कीटनाशकों और फंफूदीनाशकों का उपयोग करवा रहे है। इससे लागत बढ़ रही है। 

प्रदेश में 40 हजार हैक्टयर क्षेत्र में अनार की बागवानी हो रही है। इसका सालाना कारोबार 20-22 अरब के लगभग है। ऐसे में रिसर्च स्टेशन और प्रोसेसिंग की जरूरत किसानों को है। विश्वविद्यालय ने अनार की पीओपी तैयार की है। साथ ही, पौध कटिंग का प्रशिक्षण युवाओं को दिया है।

डॉ. प्रदीप पगारिया, वरिष्ठ वैज्ञानिक, केवीके गुडामालानी, बाड़मेर


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