सिंचाई पाइपलाइन बनी मरूधरा के किसानों की नई गंगा

नई दिल्ली 24-Nov-2025 05:09 PM

सिंचाई पाइपलाइन बनी मरूधरा के किसानों की नई गंगा

(सभी तस्वीरें- हलधर)

पीयूष शर्मा

जयपुर। समय के साथ सिंचाई की कई नई तकनीकों का ईजाद हो चुका हैं। लेकिन, ग्रामीण क्षेत्रों में पाइप लाइन का क्रेज अब भी कम नहीं हुआ है। घर अथवा खेत में लगे पाइप की संख्या किसान की आर्थिक स्थिति से रूबरू करवा ही देते है। गौरतलब है कि मरूधरा में ऐसी कोई गंगा नहीं है, जिससे किसानों को सालभर सिंचाई के लिए पानी मिल जाएं। विशेषकर पठारी और पश्चिमी जिलों में पानी की पीड़ किसी से छिपी नहीं है। पानी को लिफ्ट कराने में किसानों का सच्चा हमदम अब भी पाइप लाइन ही है। बता दें कि प्रदेश में दो लाख किलोमीटर से ज्यादा पाइपलाइन का उपयोग हो रहा है। यह आंकड़ा वह है जिस पर कृषि विभाग के द्वारा अनुदान दिया जा चुका है। लेकिन, वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सिंचाई पाइपलाइन से पानी की ज्यादा बचत नहीं होती। लेकिन, इसके महत्व को कम नहीं आंका जा सकता। क्योंकि, फव्वारा, ड्रिप, रेनगन तकनीक से पूर्व जलबचत का यही एक मात्र विकल्प था। मरूधरा में खेती का परिदृश्य बदलने में सिंचाई पाइप लाइन सिस्टम का भी बड़ा रोल है। गौरतलब है कि कृषि विभाग  राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और राज्य योजना अंतर्गत सिंचाई पाइप लाइन पर किसानों को अनुदान उपलब्ध करवा रहा है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसान के पास कृषि योग्य भूमि होनी चाहिए और सिंचाई के साधन जैसे, कुएं, ट्यूबवेल, फार्म पौंड होने चाहिए। वहीं, सामलाती सिंचाई साधन होने पर भी सभी किसान आवेदन कर सकते हैं। जिन किसानों के पास सिंचाई का स्रोत नहीं है और अन्य किसान से भी पानी ले रहे हैं, तो ऐसे किसान भी आवेदन कर सकते है। इसके अलावा किसान को पाइप का ब्रांड और निर्माण तारीख की जानकारी होनी चाहिए। प्रशासनिक स्वीकृति के 60 दिन में पाइप लाइन की बिछानी होती है। गौरतलब है कि सिंचाई पाइप लाइन पर वर्ष 1995-96 के दौरान सरकार ने अनुदान देना शुरू किया था। गौरतलब है कि खेती-किसानी में समय के साथ सिंचाई सबसे बड़ी समस्या उभर कर सामने आई है। प्रदेश के कई ऐसे जिले है जो भूजल के लिहाज से डार्क जोन में आ चुके है। इसका सीधा प्रभाव किसान की आय के साथ-साथ फल उत्पादन पर देखने को मिल रहा है।

.24 ट्रिलियन लीटर पानी की बचत

उद्यान विभाग के संयुक्त निदेशक राजेन्द्र खींचड़ ने बताया कि पाइप लाइन का मुख्य उपयोग पानी को लिफ्ट कराने के लिए किसान करते है। उन्होने बताया कि पानी को लिफ्ट कराने में भी पानी का अपव्यय होता है। लेकिन, पानी लाइन के उपयोग के लिफ्टिंग के दौरान 7 से 15 फीसदी पानी की बचत संभव है। उन्होंने बताया कि पाइप लाइन के क्षेत्र में अब तक हुई प्रगति के आधार पर यह क हा जा सकता है कि राजस्थान हर साल .24 ट्रिलियन लीटर पानी की बचत कर रहा है।

यह मिलता है अनुदान

इस योजना में सभी श्रेणी के किसानों को 50 फीसदी (15000 रुपए) अनुदान दिया जाता है। जबकि, लघु और सीमांत किसानों को 60 फीसदी यानी अधिकतम 18000 रुपए की सब्सिडी दी जाती है।

इस तरह का होना चाहिए पाइप

एचडीपीई पाइप लाइन के लिए आईएस कोड- 4984/17425:2020 होना चाहिए। पीवीसी पाइप लाइन के लिए आईएस कोड-4984/4 केजी63 एमएम अथवा इससे अधिक हो और 2.5केजी/90 एमएम अथवा इससे अधिक होनी चाहिए। एचडीपीई लैमीनेटेड फ्लैट ट्यूब पाइप आइएस कोड-16190:2014 हो और 63 एम एम अथवा इससे अधिक और 200 एमएम या इससे अधिक होना चाहिए।  इसमें सब्सिडी 63 एमएम या अधिक पर ही मिलेगी


ट्रेंडिंग ख़बरें