दलहन किसानों को ₹10,000 की मदद, मुफ्त बीज और 100% खरीद

नई दिल्ली 14-Jul-2026 04:19 PM

दलहन किसानों को ₹10,000 की मदद, मुफ्त बीज और 100% खरीद

(सभी तस्वीरें- हलधर)

दलहन किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने देश को दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए 'राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन (2025–31)' शुरू किया है। इस मिशन के तहत किसानों को ₹10,000 प्रति हेक्टेयर तक आर्थिक सहायता, मुफ्त उन्नत बीज किट, आधुनिक खेती का प्रशिक्षण और PM-AASHA योजना के तहत तूर, उड़द और मसूर की 100% सरकारी खरीद की गारंटी दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ दालों के आयात पर निर्भरता कम करना है।

35 लाख हेक्टेयर में बढ़ेगी दलहन की खेती

मिशन के तहत देशभर में चावल की कटाई के बाद खाली रहने वाली जमीन (राइस फेलो) और अन्य उपयुक्त क्षेत्रों में 35 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में दलहन की खेती का विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही इंटरक्रॉपिंग (अंतर-फसल) और फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि किसान कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकें।

किसानों को मिलेंगे मुफ्त उन्नत बीज

बेहतर उत्पादन के लिए सरकार 126 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज तैयार और वितरित करेगी। इसके अलावा किसानों को 88 लाख मुफ्त उन्नत बीज किट उपलब्ध कराई जाएंगी। बीजों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए SATHI पोर्टल के माध्यम से उनकी निगरानी की जाएगी।

MSP पर 100% खरीद की गारंटी

दलहन किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि PM-AASHA योजना के तहत तूर (अरहर), उड़द और मसूर की 100 प्रतिशत सरकारी खरीद की जाएगी। अगले चार वर्षों तक NAFED और NCCF जैसी एजेंसियां किसानों से सीधे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर पूरी उपज खरीदेंगी। इससे किसानों को बाजार में कीमत गिरने का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।

गांवों में लगेंगी 1,000 प्रोसेसिंग यूनिट

कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने के लिए देशभर में 1,000 दाल प्रोसेसिंग एवं पैकेजिंग यूनिट स्थापित की जाएंगी। प्रत्येक यूनिट के लिए सरकार 25 लाख रुपये तक की सब्सिडी देगी, जिससे स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

2030-31 तक सरकार के बड़े लक्ष्य

सरकार ने मिशन के तहत वर्ष 2030-31 तक कई महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं—

  • दलहन का रकबा बढ़ाकर 310 लाख हेक्टेयर करना।
  • कुल उत्पादन 350 लाख टन तक पहुंचाना।
  • औसत उत्पादकता बढ़ाकर 1,130 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करना।
  • किसानों की आय में वृद्धि और दालों के आयात पर निर्भरता को काफी हद तक कम करना।

किसानों के लिए क्यों है यह मिशन खास?

यह मिशन केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। इसमें उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक, सरकारी खरीद की गारंटी, प्रोसेसिंग सुविधाएं और बाजार सुरक्षा जैसी कई व्यवस्थाएं शामिल हैं। इससे किसानों को उत्पादन बढ़ाने, लागत घटाने और बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी। साथ ही मिट्टी की उर्वरता में सुधार, फसल विविधीकरण और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।


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