41 जिलों को 8 क्लस्टरों में बांटा, एक कंपनी को अधिकतम दो क्लस्टर PMFBY
41 जिलों को 8 क्लस्टरों में बांटा, एक कंपनी को अधिकतम दो क्लस्टर PMFBY
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार ने कई आमूलचूल बदलाव किए है। ताकि, बीमा कम्पनियों की जवाबदेही तय की जा सके और फसल बीमा में गड़बड़ी रोकी जा सके। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने बताया कि पहले तीन वर्षीय निविदा जारी होती थी। लेकिन,चालू वर्ष में एक वर्षीय निविदा के आधार पर बीमा कम्पनियों का चयन किया गया है। प्रदेश के 41 जिलों को 8 कलस्टर में बाटा गया है। साथ ही, एक कंपनी को अधिकतम दो कलस्टर का जिम्मा दिया गया है। उ्रन्होंने बताया कि योजना में कप-एंड-कैप मॉडल (60:130) को यथावत रखा गया है। वहीं, बीमा कंपनियों को अब बीमा पॉलिसी जारी होने के 7 दिवस के भीतर किसान को उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है। योजना के प्रभावी संचालन के लिए प्रत्येक जिले में संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) के अधीन एक तकनीकी रूप से दक्ष कार्मिक की नियुक्ति बीमा कंपनी द्वारा की जाएगी।
यस एंड़ टीच से दावा निर्धारण
निविदा में पहली बार यस एंड़ टीच तकनीक को प्रभावी बनाया गया है। गेहूं और सोयाबीन में फसल कटाई प्रयोग और यस एंड़ टीच आधारित आंकड़ों को 50:50 अनुपात के आधार पर औसत उपज का आकलन किया जाएगा। भविष्य में चयनित अन्य फसलों में यह अनुपात 70:30 रहेगा।
कंपनियों को देना होगा जुर्माना
निविदा में पहली बार 2 प्रतिशत बिड सिक्योरिटी, अधिकतम 100 करोड़ और 5 प्रतिशत कार्य निष्पादन प्रतिभूति का प्रावधान किया गया है। साथ ही, पोस्ट हार्वेस्ट हानि के मामलों में 48 घंटे के भीतर सर्वेयर नियुक्त नहीं करने अथवा निर्धारित समय में सर्वे नहीं करने पर प्रति बीमा इकाई 20,000 तक की शास्ति का प्रावधान किया गया है। निर्धारित अवधि में सर्वे नहीं करने पर प्रति शिकायत 1,000 की शास्ति और बीमा दावों का समय पर भुगतान नहीं करने पर बीमा कंपनी द्वारा 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान किया जाएगा।
किसान को मिलेगी रिपोर्ट
पोस्ट हार्वेस्ट हानि के सर्वेक्षण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सर्वेयर द्वारा सर्वे प्रपत्र की तीन प्रतियां तैयार की जाएंगी। इनमें एक प्रति किसान को, एक प्रति कृषि विभाग को और तीसरी प्रति सर्वेयर के अभिलेख में सुरक्षित रखी जाएगी। इससे सर्वे प्रक्रिया में पारदर्शिता के साथ-साथ किसान के पास भी सर्वे का प्रमाण उपलब्ध रहेगा।
राज्य पर वित्तीय भार कम
प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया के तहत पूर्व की तुलना में प्रीमियम दर अत्यंत कम प्राप्त हुई है। पूर्ववर्ती निविदा में औसत सकल प्रीमियम दर 9.63 प्रतिशत थी, जो वर्तमान में घटकर मात्र 1.19 प्रतिशत रह गई है। इसी प्रकार किसानों द्वारा देय कुल प्रीमियम राशि 979.15 करोड़ रुपये से घटकर लगभग 645 करोड़ रुपये रह गई है। इससे किसानों को लगभग 335 करोड़ रुपये की वित्तीय बचत होगी। वहीं राज्यांश प्रीमियम अनुदान भी 1,878.27 करोड़ रुपये से घटकर लगभग 51 करोड़ रुपये रह गया है।