रेगिस्तान में उगने वाला तुम्बा क्यों है खास, जानिए रिसर्च में सामने आए राज 

नई दिल्ली 27-Oct-2026 04:56 PM

रेगिस्तान में उगने वाला तुम्बा क्यों है खास, जानिए रिसर्च में सामने आए राज 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। रेगिस्तान में कम पानी और कमजोर जमीन को खेती की सबसे बड़ी चुनौती माना जाता है, लेकिन इन्हीं विपरीत परिस्थितियों में प्राकृतिक रूप से पनपने वाला तुम्बा किसानों के लिए भविष्य की उपयोगी फसल साबित हो सकता है। लंबे समय से कम उपयोग में लिया जा रहा यह पौधा न केवल सूखा और अत्यधिक तापमान झेलने में सक्षम है। बल्कि, इसके फल और बीजों में मौजूद औषधीय एवं पोषक तत्व इसे खेती से लेकर औषधीय उत्पादों के वैल्यू एडिशन तक महत्वपूर्ण बनाते हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली की शोध पत्रिका इंडियन हार्टिकल्चर में प्रकाशित एक शोध में वैज्ञानिकों ने तुम्बा की इन्हीं खूबियों को सामने रखा है। प्रकाश सिंघाथिया, प्रकाश महला, महिमा सनोडिया और अनुज सोही के इस आलेख के अनुसार तुम्बा शुष्क और अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों की देशज वनस्पति है और कम उर्वरता वाली सीमांत भूमि में भी बढऩे की क्षमता रखती है।

कम उपजाऊ जमीन में भी दम

तुम्बा की सबसे बड़ी ताकत इसकी प्रतिकूल परिस्थितियों को सहने की क्षमता है। शोध के मुताबिक यह पौधा सूखे और अत्यधिक तापमान के प्रति उल्लेखनीय सहनशीलता रखता है। यही वजह है कि जहां पानी की कमी और कमजोर मिट्टी के कारण दूसरी फसलों का उत्पादन चुनौतीपूर्ण हो जाता है, वहां तुम्बा जैसे पौधों की उपयोगिता बढ़ सकती है। गौरतलब है कि प्रदेश के शुष्क और रेतीले इलाकों में इसे प्राकृतिक रूप से उगते हुए देखा जाता है। 

प्रोटीन और वसा भी भरपूर

तुम्बा की अहमियत केवल इसके सूखा सहन करने तक सीमित नहीं है। शोध में दिए गए पोषण संबंधी आंकड़ों के मुताबिक इसके बीजों में 13 से 26 प्रतिशत प्रोटीन, 20 से 30 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट और 14 से 24 प्रतिशत वसा पाई जाती है। वहीं फल के गूदे में नमी की मात्रा 85 से 90 प्रतिशत, प्रोटीन 2 से 4 प्रतिशत और कार्बोहाइड्रेट 7 से 10 प्रतिशत बताई गई है। तुम्बा के फल और बीजों में एल्कलॉइड, एसेंशियल ऑयल, फ्लेवोनॉइड और ुकुकुर्बिटासिन जैसे कई जैव-सक्रिय यौगिक पाए जाने का उल्लेख भी आलेख में किया गया है। इसके बीज का तेल भी लाभकारी फैटी एसिड और जैव-सक्रिय तत्वों के कारण महत्वपूर्ण माना गया है।

औषधीय गुणों ने बढ़ाई अहमियत

तुम्बा का इस्तेमाल परंपरागत रूप से आयुर्वेद और देशज चिकित्सा प्रणालियों में होता रहा है। रिसर्च के अनुसार इसके अर्क में मधुमेहरोधी, रेचक, सूजनरोधी और रोगाणुरोधी गुण पाए गए हैं। इसी औषधीय क्षमता के कारण इसके फल, बीज और उनसे तैयार उत्पादों के उपयोग की संभावनाएं बढ़ती हैं।

वैल्यू एडिशन में छिपा अवसर

तुम्बा को लेकर सबसे अहम पहलू इसका आर्थिक उपयोग है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसकी सहनशीलता और चिकित्सीय क्षमता को देखते हुए इसकी खेती औरं उपयोग को बढ़ावा देने से शुष्क क्षेत्रों में टिकाऊ कृषि को मजबूती मिल सकती है। औषधीय पौध संसाधनों के रूप में इसका प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन ग्रामीण आजीविका के नए रास्ते भी खोल सकता है।