नर्मदा जल सहेजेगा राजस्थान, भंडारण के लिए बनेगी DPR

नई दिल्ली 28-Oct-2026 12:29 PM

नर्मदा जल सहेजेगा राजस्थान, भंडारण के लिए बनेगी DPR

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। राजस्थान मानसून के दौरान नर्मदा में उपलब्ध अतिरिक्त पानी को अब व्यर्थ नहीं बहने देगा। राज्य सरकार इस अधिशेष जल के भंडारण और उपयोग के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करवा रही है। इस पानी का इस्तेमाल प्रदेश के जल संकट वाले क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यह जानकारी केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की अध्यक्षता में हुई नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण समीक्षा समिति की 15वीं बैठक में दी। बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सहित वरिष्ठ अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1979 के नर्मदा जल विवाद अधिकरण के तहत मानसून अवधि में उपलब्ध अधिशेष जल के उपयोग के लिए राजस्थान तेजी से काम कर रहा है। इसका उद्देश्य अतिरिक्त पानी को संरक्षित कर जलाभाव वाले इलाकों तक पहुंचाना है।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने कहा कि राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच 7 जुलाई  को हुए समझौते को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। आपसी समन्वय और सहयोग से वर्षों पुराने अंतरराज्यीय जल मुद्दों के समाधान की दिशा में प्रगति हुई है।

जालोर-बाड़मेर में नर्मदा नहर बनी जल दक्षता का मॉडल

मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा नहर परियोजना के तहत जालोर और बाड़मेर के दूरस्थ क्षेत्रों में जल दक्षता का मॉडल विकसित किया गया है। पूरे कमांड क्षेत्र में फव्वारा सिंचाई को अनिवार्य किया गया है, जिससे पानी की छीजत बेहद कम हुई है। परियोजना के 2.46 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य कमांड क्षेत्र में 40 प्रतिशत सिंचाई सघनता का लक्ष्य हासिल किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की सुनिश्चित उपलब्धता सरकार की प्राथमिकता है। रामजल सेतु लिंक परियोजना और यमुना जल समझौते के बाद नर्मदा के अधिशेष जल के उपयोग की पहल से प्रदेश के जल संकट वाले क्षेत्रों के लिए नई संभावनाएं बनेंगी।


ट्रेंडिंग ख़बरें