सिर्फ 7 भैंसों से शुरू किया कारोबार, आज महीने में लाखों की कमाई 

नई दिल्ली 28-Oct-2026 12:50 PM

सिर्फ 7 भैंसों से शुरू किया कारोबार, आज महीने में लाखों की कमाई 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

ढाणी लीला की,सीकर। यदि कुछ करने का जज्बा है तो पढ़ाई ज्यादा मायने नहीं रखती है। जी हां, दसवीं पास पशुपालक सुभाष चंद्र ने ऐसा ही कुछ करके दिखाया है। किसान सुभाष पहले परम्परागत फसल उत्पादन से डेढ़-दो लाख रूपए सालाना कमाते थे। लेकिन, अब पशुधन के सहारे 6-7 लाख रूपए मासिक की आय ले रहे है। किसान सुभाष ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 20 बीघा जमीन है। दसवीं पास करने के बाद मैं भी खेती से जुड़ गया। लेकिन, काम करने वाले ज्यादा और जमीन का रकबा कम होने की स्थिति को देखते हुए मैने पशुपालन की ओर सोचना शुरू किया। घरेलू पशुधन के सहारे डेयरी का कार्य शुरू किया। जैसे-जैसे आय बढ़ती गई, उन्नत नस्ल के पशुओं की खरीद करता रहा। इससे दुग्ध उत्पादन में बढौत्तरी देखने को मिली। आय का ग्राफ भी इससे बढ़ा है। उन्होंने बताया कि पहले परम्परागत तौर-तरीके से पशुपालन करता रहा। लेकिन, बाद में वैज्ञानिक प्रबंधन तकनीक का उपयोग करने लगा। गौरतलब है कि पशुपालक सुभाष ने 7-8 पशुओं से डेयरी शुरू की थी। लेकिन, आज हालत काफी जुदा है। पशुधन की संख्या 10 गुना हो चुकी है। उन्होंने बताया कि खेतों का पानी सूख चुका है। लेकिन, दुग्ध की धारा अविरल बह रही है। उन्होंने बताया कि जल संरक्षण के लिए खेत में डिग्गी बनाई हुई है। सिंचाई के लिए ट्यूबवैल है। परम्परागत फसलों में गेहूं, बाजरा और सरसों का उत्पादन लेता हॅू। सिंचाई की कमी होने के चलते हरे चारा का सीमित उत्पादन लेता हॅू। हरे चारे के साथ पशु आहार की खरीद बाजार से कर रहा हॅू।

7-8 क्विंटल दुग्ध का उत्पादन

उन्होंने बताया कि खेती से ज्यादा पशुपालन मेरे लिए लाभकारी साबित हो रहा है। इस कार्य से जुड़े हुए दो दशक हो चुके है। पशु डेयरी का कार्य 7-8 पशुधन के साथ शुरू किया था। जैसे-जैसे मुनाफा मिलता गया नस्ल सुधार के साथ पशुधन की संख्या भी बढ़ाता रहा। इसी का परिणाम है कि वर्तमान में 30 मुर्रा नस्ल की भैंस मेरे पास है। शेष हॉलिस्टिन नस्ल की गाय है। कुल पशुधन की संख्या 80 के करीब है। इनसे प्रतिदिन 7-8 क्विंटल दुग्ध का उत्पादन होता है। दुग्ध का विपणन डेयरी के अलावा उपभोक्ता और मावा-रसगुल्ला कारोबारियों को कर रहा हॅू। खर्चा निकालने के बाद 7-8 लाख रूपए महीने की आय मिल जाती है। हालांकि, चारा महंगा होने के कारण पशुपालन का खर्च अब बढ़ चुका है।

वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन

उन्होंने बताया कि पशुधन के लिए 100 गुना 50 आकार का शेड़ बनाया हुआ है। पशुओं को दैनिक आहार वैज्ञानिक माप के आधार पर दे रहा हॅू। साथ ही, दुग्ध दोहन का कार्य मशीन से हो रहा है। परिवार संयुक्त होने से प्रत्येक सदस्य की अपनी-अपनी जिम्मेदारी बटी हुई है। इस कारण नुकसान की संभावना कम रहती है। उन्होंने बताया कि हर माह पशु स्वास्थ्य की जांच पशु चिकित्सकों से करवा रहा हॅू। साथ ही, दुग्ध का रिकॉर्ड भी रख रहा हॅू। इससे पशु की नब्ज जल्द ही पकड़ में आ जाती है।


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