रजनीगंधा की खेती बढ़ाएगी आमदनी, किसान कम लागत में कमाएं ज्यादा मुनाफा

नई दिल्ली 19-Mar-2026 04:27 PM

रजनीगंधा की खेती बढ़ाएगी आमदनी, किसान कम लागत में कमाएं ज्यादा मुनाफा

(सभी तस्वीरें- हलधर)

किसान भाई अगर खेती के जरिए अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं तो फूलों की खेती एक अच्छा विकल्प हो सकती है। रजनीगंधा (ट्यूबरोज) एक ऐसा ही एक सुगंधित सफेद फूल है, जिसकी बाजार में सालभर अच्छी मांग रहती है। इसकी 30-75 सेमी लंबी डंडियां कट फ्लावर, बुके और सजावटी कार्यों में बड़े पैमाने पर उपयोग होती हैं। खास बात यह है कि रजनीगंधा के फूलों से सुगंधित तेल (Essential Oil) भी निकाला जाता है, जिसका उपयोग परफ्यूम और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में किया जाता है। ऐसे में किसान इसकी खेती कर कम लागत में अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। 

निरंतर आय का बेहतर स्रोत बन सकती है रजनीगंधा

किसान भाई पारंपरिक फसलों के साथ रजनीगंधा की खेती अपनाकर अतिरिक्त आय का मजबूत स्रोत बना सकते हैं। इसकी फसल में कटाई बार-बार होती है, जिससे लगातार आय मिलती रहती है। इसके अलावा स्थानीय बाजार, फूल मंडियों और इवेंट डेकोरेशन में इसकी मांग अधिक रहती है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना रहती है। 

रजनीगंधा की खेती के लिए सभी जरूरी जानकारी नीचे दी जा रही है:

जलवायु और भूमि:- गर्म और नमी वाला मौसम। हल्की दोमट मिट्टी।

उन्नत किस्म

सिंगल किस्म: कलकत्ता सिंगल, रजत रेखा, कल्याण सिंगल, हैदराबाद सिंगल, प्राज्ज्वल, श्रृंगार।

डबल किस्म: कलकत्ता डबल, हैदराबाद डबल, कल्याण डबल, वैभव, फुले रजनी।

कंद की रोपाई: अप्रैल-मई। 2-3 सेमी व्यास वाले कन्द रोपाई के लिए उपयुक्त।

कतार की दूरी: 25 सेमी।

पौधे की दूरी: 10-15 सेमी।

गहराई: 4-5 सेमी।

खाद और उर्वरक: गोबर खाद 200 से 250 क्विंटल, 200-200 किलो फास्फोरस और पोटाश प्रति हैक्टयर। नत्रजन, 150 किलो मात्रा रोपाई के एक माह बाद और 150 किलो नत्रजन दो माह बाद प्रति हैक्टयर ।

सिंचाई: 5-7 दिन के अन्तराल पर। 

फूलों की कटाई: 90 से 95 दिन बाद।

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