कद्दूवर्गीय फसलों से अच्छी पैदावार के लिए किसान जरूर करें ये काम
(सभी तस्वीरें- हलधर)कद्दूवर्गीय फसलें जैसे कद्दू, लौकी, तोरई, खीरा, करेला आदि में सही पोषण नहीं मिलने पर उत्पादन में भारी गिरावट देखी जाती है। पौधे कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन तो वातावरण और पानी से ले लेते हैं, लेकिन अन्य जरूरी पोषक तत्व (नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सूक्ष्म तत्व) खेत में अलग से देना जरूरी होता है।
किसानों को नियमित रूप से फसल का निरीक्षण करना चाहिए। यदि पत्तियां पीली पड़ रही हैं, वृद्धि रुक रही है या फल सही विकसित नहीं हो रहे, तो यह पोषक तत्वों की कमी के संकेत हो सकते हैं। समय रहते इन लक्षणों की पहचान कर उचित उर्वरक प्रबंधन करना जरूरी है। यदि किसान सही समय पर पोषक तत्व प्रबंधन अपनाते हैं, तो फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में वृद्धि होती है, जिससे बाजार में अच्छा दाम मिल सकता है और किसानों की आय बढ़ती है।
नीचे पोषक तत्व प्रबंधन के तरीकों के बारे में जानकारी दी जा रही है:
नाइट्रोजन: मृदा में जैविक खाद डाले। साथ ही, यूरिया, डीएपी उर्वरक का प्रयोग करें।
फॉस्फोरस-पोटाश: भूमि में फास्फोरस-पोटाश युक्त उर्वरक का उपयोग बुवाई के समय जड़ क्षेत्र में करना चाहिए।
कैल्शियम: जिप्सम, गोबर खाद, सुपर फास्फेट का उपयोग करें।
मैग्रीशियम: मैंगनी खाद के साथ मैग्रीशियम सल्फेट का प्रयोग करे।
सल्फर: जिप्सम, सुपर फास्फेट और अन्य सल्फेट युक्त उर्वरकों का उपयोग करें।
लोहाः आयरन सल्फेट का घोल बनाकर फसल पर छिड़कें।
तांबा: कॉपर सल्फेट और चूना मिश्रण का छिड़काव करे।
जिंक: जिंक सल्फेट 4 मिली प्रति लीटर को पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
मैग्नीज: मैग्नीज युक्त सूक्ष्म तत्वों के मिश्रण का छिड़काव करें।
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