चुकंदर में 16 प्रतिशत तक शर्करा, जानें खेती से जुड़ी जरूरी जानकारी
(सभी तस्वीरें- हलधर)दवा उद्योग में चुकंदर से बनी शक्कर की सदैव मांग बनी रहती हैं। इसके अलावा सलाद और खाद्य प्रसंस्करण उत्पादन बनाने में भी चुकंदर का उपयोग होता हैं।
प्रदेश के श्रीगंगानगर, कोटा, उदयपुर, चित्तौड़गढ़ जिले में चुकंदर की खेती किसान करते हैं।
गौरमतब है कि चुकंदर में 15-16 प्रतिशत तक शर्करा पाई जाती हैं।
चुकंदर से 10 - 15 टन प्रति हैक्टेयर हरी पत्ती प्राप्त होती है। जिनका प्रयोग गर्मी में पशु को खिलाने में किया जा सकता है।
इसकी पत्नी (पत्ती) में 10 प्रतिशत क्रूड प्रोटीन तथा 60 प्रतिशत सम्पूर्ण पाचक तत्व पाये जाते हैं।
एक टन चुकंदर से 50 किग्रा. सूखा गूदा तथा 300 किग्रा. गीला गूदा प्राप्त होता है।
खेती से जुड़ी मुख्य बातें:
भूमि की तैयारी: 2-4 जुताई देशी हल से.
उन्नत किस्म:
विदेशी किस्म: मेरीबो मेरोकपोली, मेगनापोल, रोमांस कावा-06, यूएस-75, यूएसएच-9, ट्राईबेल, कायेमेगापोली.
भारतीय किस्म: पन्त एस-1, पंत कम्पोजिट - 1, पंत कम्पोजिट-3, पंत कम्पोजिट-6, आईआईएसआर कम्पोजिट-1.
बुवाई समय: 15 नवम्बर तक.
बीज दर: 5 - 6 किग्रा (एक अंकुर किस्म), 8 - 10 किग्रा प्रति हैक्टेयर (बहु अंकुर किस्म).
मेड़ की ऊंचाई: 15 सेमी.
पौधे से पौधे की दूरी: 10-20 सेमी.
पौधों की संख्या: 80000 से 1 लाख प्रति हैक्टेयर.
बीज बुवाई: 2-3 सेमी गहराई पर.
उर्वरक: 10-12 टन गोबर खाद। 120 किग्रा. नत्रजन, 60-80 किग्रा. फॉस्फोरस और पोटाश 40-60 किग्रा. प्रति हैक्टेयर। नत्रजन दो भाग में बांटकर देवे.
सिंचाई: प्रथम 2 सिंचाई 1 पखवाड़े के अंतर पर। फिर 20-25 दिन बाद.
खुदाई: 5-6 माह बाद.