यूरिया की टेंशन खत्म! कम खर्च में धान को मिलेगा भरपूर पोषण 

नई दिल्ली 01-Jun-2026 12:57 PM

यूरिया की टेंशन खत्म! कम खर्च में धान को मिलेगा भरपूर पोषण 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

बढ़ती कीमतों और कमी के बीच किसानों के लिए राहत की खबर ,धान की खेती में यूरिया का उपयोग लंबे समय से नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए किया जाता रहा है। लेकिन कई क्षेत्रों में यूरिया की उपलब्धता, बढ़ती लागत और असंतुलित उपयोग किसानों की चिंता बढ़ा रहा है। ऐसे में कृषि विशेषज्ञों ने धान की फसल को बेहतर पोषण देने के लिए कम खर्च वाला एक प्रभावी तरीका सुझाया है, जिससे उत्पादन भी बढ़ सकता है और लागत भी घट सकती है।

सिर्फ यूरिया पर निर्भर रहना क्यों है नुकसानदायक
विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार और अधिक मात्रा में यूरिया डालने से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इससे पौधों में कीट और रोगों का खतरा बढ़ सकता है, जबकि पोषक तत्वों का संतुलन भी बिगड़ जाता है। यही कारण है कि अब संतुलित पोषण प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है।

एक्सपर्ट का फॉर्मूला: जैव उर्वरक और संतुलित खाद का इस्तेमाल
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि किसान धान की फसल में यूरिया की कुछ मात्रा कम करके जैव उर्वरकों, गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट और नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले सूक्ष्म जीवों का उपयोग कर सकते हैं। इससे पौधों को आवश्यक पोषण मिलता है और रासायनिक खाद पर निर्भरता घटती है।

नीम कोटेड यूरिया से बढ़ेगा फायदा
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सामान्य यूरिया की बजाय नीम कोटेड यूरिया का प्रयोग किया जाए। इससे नाइट्रोजन की हानि कम होती है और पौधों को लंबे समय तक पोषण मिलता रहता है। परिणामस्वरूप कम मात्रा में भी बेहतर प्रभाव देखने को मिलता है।

पत्तियों पर स्प्रे से भी पूरी होगी पोषण की जरूरत
धान की महत्वपूर्ण अवस्थाओं पर नैनो यूरिया या घुलनशील उर्वरकों का पर्णीय छिड़काव (फोलियर स्प्रे) करने से पौधों को तेजी से पोषण मिलता है। इससे खेत में बार-बार यूरिया डालने की जरूरत भी कम हो सकती है।

किसानों के लिए खास सलाह
धान की अच्छी पैदावार के लिए केवल यूरिया पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाएं। जैव उर्वरकों, जैविक खाद, नीम कोटेड यूरिया और फोलियर स्प्रे के संयोजन से कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इससे मिट्टी की सेहत भी सुधरेगी और खेती अधिक टिकाऊ बनेगी।


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