घर में बनाएं जैविक खाद, कम खर्च में पाएं बंपर पैदावार
(सभी तस्वीरें- हलधर)मुख्य विचार (बाएं बॉक्स में): "खेत में बेहतर उपज के लिए अधिक रासायनिक खाद के इस्तेमाल से भूमि की उपज क्षमता खत्म होने से मिट्टी बंजर होती जा रही है। भूमि की पानी सोखने की क्षमता भी घटती जा रही है। जिससे वह और भी सख्त हो रही है। रासायनिक खाद के उपयोग से तैयार सब्जियां खाकर लोग कई तरह की बीमारियों का भी शिकार हो रहे हैं। एक समय था जब फसल की उपज व पैदावार को बढ़ने के लिए वैज्ञानिकों ने रासायनिक खाद के इस्तेमाल को महत्ता दी थी। लेकिन, रसायन के दुष्प्रभाव को देखते हुए अब सरकार और किसानों का रुझान जैविक खेती की ओर बढ़ रहा है।"
1. जैविक खाद तैयार करने की विधि
खेत में खाद और तत्व की पूर्ति के लिए सूक्ष्मजीवों की सहायता ली जाती है। भूमि में सूक्ष्मजीव की संख्या में बढ़ोतरी और पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए दलहन की फसलों में 4 से 5 पैकेट राइजोबियम कल्चर प्रति एकड़ के हिसाब से डालें। वहीं एक दाल की फसलों में एजेक्टोबैक्टर कल्चर को इतनी ही मात्रा में डालें। भूमि में उपस्थित फास्फोरस को घोलने के लिए पीएसबी कल्चर 5 पैकेट प्रति एकड़ का प्रयोग करें। यह खाद भूमि की तत्वों में सुधार कर सूक्ष्म जीवों की संख्या में वृद्धि करेगी और हवा का संचार भी बढ़ाएगी। जिससे खेती में पानी सोखने और धारण करने की क्षमता में भी सुधार होगा। फसलों का अच्छी मात्रा में उत्पादन भी होगा।
2. नाडेप विधि द्वारा तैयार खाद
नाडेप खाद तैयार करने के लिए 12 फीट लम्बाई, चौड़ाई 5 फीट और ऊंचाई 3 फीट आकार का गड्ढा बना लें। इसके बाद इसमें 75 प्रतिशत वनस्पति के सूखे अवशेष, 20 प्रतिशत हरी घास, गाजर घास, गाजर घास पुवाल, 5 प्रतिशत गोबर और 2000 लीटर पानी। सबसे पहले कचड़े को चार अंगुल तक गड्ढे में भर दें। फिर दो अंगुल तक मिट्टी की परत डाल दें। इसमें पानी डालें जब पूरा नाडेप भर जाये तब 4 अंगुल मिट्टी से ढक दें। तैयार कचरे के ऊपर 12-15 किलो तक रॉक फास्फेट की परत को बिछाकर पानी से भिगो दें। इसके बाद फिर इसके ऊपर 1 अंगुल तक मोटी मिट्टी को बिछाकर पानी डाल दें। भरे हुए गड्ढे पर 4 अंगुल मिट्टी की परत ढक दें। 2 अंगुल नीम पत्ती की गीली परत को कचरे के ऊपर बिछा दें इसके बाद 60 दिन पश्चात सब्बल से डेढ़-डेढ़ फुट पर छेद कर 15 लीटर पानी में 5 पैकेट पीएसबी और 5 पैकेट एजेक्टोबैक्टर कल्चर को घोलकर छेद में भर दें। इसके बाद इन छेदों को मिट्टी से भर दें।
3. जैविक मटका खाद
एक फुट का गड्ढा खोद लें। फिर उसमें कैंटीन, होटल, रसोई द्वारा एकत्रित किए हुए कचरे को भर दें। इन अपशिष्ट युक्त गड्ढे में लगभग 250 ग्राम जीवाणुओं को डालें। यह जीवाणु अपघटन बढ़ाने का कार्य करते हैं। इसके बाद पानी और मिट्टी की एक गीली परत को खाद में मिश्रित कर उस पर बिछा दें। ताकि, नमी बरकरार रहे। 25-30 दिनों के पश्चात् यह अपशिष्ट माइक्रोबियल अमीर खाद के रूप में परिवर्तित हो जायेगा। यह प्रक्रिया प्रत्येक 30 से 35 दिन के अंतराल में दोहराई जा सकती है।
4. सूखा जैविक उर्वरक खाद
इस तरह की खाद को रॉक फास्फेट अथवा समुद्री घास में से किसी एक चीज़ द्वारा बनाया जा सकता है। इन्हें कई तरह के अवयवों के साथ मिश्रित किया जा सकता है। सभी जैव उर्वरक पोषक तत्वों के व्यापक सरणी उपलब्ध करते हैं, कुछ मिश्रण जैसे नाइट्रोजन, पोटेशियम और फास्फोरस की मात्रा को संतुलित रखने के साथ सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करने के लिए तैयार होते हैं। वर्तमान समय में कई तरह के मिश्रण उपलब्ध हैं, जिनकी सहायता से अपना खुद का संसोधन के मिश्रण से खुद ही बना सकते हैं।
5. तरल जैव उर्वरक
इस तरह की खाद को समुद्री शैवाल अथवा चाय के पत्तों द्वारा बनाया जाता है। तरल उर्वरक का उपयोग पौधों में उपस्थित पोषक तत्वों को बढ़ाने के प्रयोग में लाया जाता है। इसके लिए इसमें हर महीने अथवा प्रत्येक दो सप्ताह के अंतराल में पौधों पर छिड़काव करना चाहिए। स्प्रे के रूप में स्प्रेयर टंकी में तरल जैव उर्वरक के मिश्रण को भर कर स्प्रे करना चाहिए।
6. विकास बढ़ाने वाला उर्वरक
समुद्री घास की राख से तैयार एक उर्वरक विचार है जो कि सबसे आम विकास बढ़ाने वाला उर्वरक है। यह उर्वरक अधिक प्रभावी ढंग से पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करता है। इसका इस्तेमाल पुराने समय से किसानों द्वारा किया जा रहा है।
7. पंचगव्य खाद
एक मटका लें। उसमें गाय का दूध, दही, मक्खन, घी, मूत्र, गोबर और नारियल डालकर लकड़ी की छड़ी से अच्छे से मिला लें। तीन दिनों के लिए मिश्रण युक्त बर्तन को बंद करके रख दें। तीन दिनों के बाद इसमें केले और गुड़ को डाल कर मिला दें। इस पूरे मिश्रण को 21 दिनों तक हर रोज मिलाते रहें। इसके पश्चात जब मिश्रण से गंध आने लगे। फिर 10 लीटर के मिश्रण में को 200 मिलीलीटर तैयार मिश्रण मिला लें और पौधों पर स्प्रे करें।
दाहिने कॉलम के अन्य नुस्खे:
ग्रीन टी का इस्तेमाल: ग्रीन टी के कमजोर मिश्रण को पानी में मिलाकर प्रत्येक चार सप्ताह में स्प्रे कर सकते हैं।
जिलेटिन खाद का इस्तेमाल: जिलेटिन पौधों के लिए एक अधिक मात्रा वाला नाइट्रोजन का स्रोत है। इसे बनाने के लिए गर्म पानी के एक कप में जिलेटिन पैकेट मिला दें। इस्तेमाल के समय ठंडे पानी के 3 कप को मिला लें। इसके इस्तेमाल एक महीने के अंतराल में करें।
मछली घर का पानी: मछली अपशिष्ट को एक अच्छा उर्वरक माना जाता है। इसलिए मछली घर टैंक से पानी बदलते समय उसके पानी को पौधों में छिड़काव के काम में लाया जा सकता है।