कद्दूवर्गीय फसलों में कीट-रोग नियंत्रण के लिए करें ये कारगर उपाय
(सभी तस्वीरें- हलधर)अगर आप खीरा, ककड़ी, खरबूजा, तरबूज, लौकी, तुरई, टिंडा, करेला, पेठा या परवल जैसी कद्दूवर्गीय सब्जियों की खेती करते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है। इन फसलों पर अक्सर कीट और रोगों का ज्यादा प्रकोप होता है, जिससे पैदावार पर सीधा असर पड़ता है। समय पर नियंत्रण न किया जाए तो कई बार पूरी फसल भी खराब हो सकती है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए इन कीट-रोगों की पहचान और समय पर रोकथाम करना बेहद जरूरी है।
प्रमुख कीट
लाल भृंग: जड़ो के पास 3-4 सेमी. गहराई पर कार्बोफ्यूरान 3 जी दाना 7 किग्रा प्रति हैक्टयर की दर से मिलाए। अधिक प्रकोप होने पर 25 किग्रा प्रति हैक्टयर की दर से कार्बोरिल 1.5 प्रतिशत चूर्ण अथवा मैलाथियॉन 5 प्रतिशत चूर्ण का भुरकाव करे।
बरूथी (माइटस): नीम की निम्बोली के 5 प्रतिशत सत्व का
छिडकाव करे। नीम आधारित कीटनाशक जैसे निर्माक 0.5 प्रतिशत अथवा रीपेलिन 1.0 प्रतिशत अथवा मर्गोसाइड 0.1 प्रतिशत प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
फलमक्खी: नियंत्रण के लिए 1.25 लीटर मैलाथियॉन 50 ईसी और 12.5 किग्रा गुड अथवा चीनी को पानी में मिलाकर प्रति हैक्टयर छिड़काव करे।
प्रमुख रोग
तुलासिता: 25 किग्रा प्रति हैक्टयर की दर से गधंक चूर्ण का भुरकाव करे। अथवा कैराथेन 1 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करे।
झुलसा रोग, छाछ्या : मेन्कोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करे।
जड़ ग्रन्थि रोग: अधिक प्रकोप होने पर कार्बोफ्यूरॉन 1-2 किग्रा सक्रिय तत्व प्रति हैक्टयर की दर से बुवाई पूर्व खेत मे डालकर मिट्टी में मिला देना चाहिए।
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