किसान गर्मी में तुरई की फसल लगाकर कमा सकते हैं लाखों रुपए

नई दिल्ली 11-Mar-2026 04:40 PM

किसान गर्मी में तुरई की फसल लगाकर कमा सकते हैं लाखों रुपए

(सभी तस्वीरें- हलधर)

अगर किसान कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली सब्जी फसल की तलाश में हैं, तो तुरई की खेती एक बेहतरीन विकल्प बन सकती है। जायद और खरीफ दोनों मौसम में उगाई जाने वाली यह बेल वाली फसल बाजार में अच्छी मांग के साथ किसानों को बेहतर आय भी देती है। पोषण से भरपूर और स्वादिष्ट होने के कारण इसकी सब्जी की खपत लगातार बनी रहती है। तुरई की बेल पर नर और मादा फूल अलग-अलग स्थानों पर खिलते हैं। सामान्यतः नर फूल पहले गुच्छों में आते हैं, जबकि मादा फूल बेल की पार्श्व शाखाओं पर अकेले विकसित होते हैं। इसके चमकीले पीले रंग के आकर्षक फूल शाम के समय, करीब 5 से 8 बजे के बीच खिलते हैं, जो इस फसल की खास पहचान मानी जाती है। सही जानकारी और नीचे बताए गए वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान तुरई की खेती से अच्छा उत्पादन और मुनाफा कमा सकते हैं।

तुरई फसल के लिए बुवाई समय

ग्रीष्मकालीन फसलः फरवरी-मार्च

वर्षाकालीन: जून-जुलाई

जलवायुः ऊष्ण और नम जलवायु

भूमि की तैयारीः पहली जुताई मिट्टी पलटनें वाले हल से करें। इसके बाद 2-3 जुताई हैरो अथवा कल्टीवेटर से करें।

बीज दर: 4-5 किग्रा प्रति हैक्टयर।

पंक्ति और पौधों की दूरी- 1-2 मीटर।

उन्नत किस्मः पूसा नसदार, एमए.-11, कोयम्बटूर-1, 2, पीकेएम-01, पूसा चिकनी, कल्याणपुर चिकनी, राजेन्द्र आशीष, सीएचआरजी-1, पीआरजी.-7, पूसा नेह, स्वर्ण मंजरी, पंजाब सदाबहार ।

खाद-उर्वरक: 35-40 टन सड़ी गोबर खाद, 100-125 किलोग्राम एनपीके। गोबर खाद को बिखरने के बाद आखिरी जुताई के वक्त खेत में उर्वरक छिडक दें। उसके बाद पौधों के विकास के दौरान लगभग 15 किलो यूरिया की मात्रा को पौधों की तीसरी सिंचाई के साथ देना चाहिए, जिससे पौधे अच्छे से विकसित होते हैं।


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