उड़द फसल में कीट-रोगों का खतरा, बचाव के ये आसान उपाय अपनाएं 

नई दिल्ली 05-Sep-2026 01:07 PM

उड़द फसल में कीट-रोगों का खतरा, बचाव के ये आसान उपाय अपनाएं 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

उड़द फसल जमीन में नाइट्रोजन स्थिरीकरण की वजह से हरी खाद के रूप में भी काम में ली जाती है। दाल की भूसी पशु आहार के रूप में, हरे और सूखे पौधों से उत्तम पशु चारा प्राप्त होता है। साथ ही, दलहन के रूप में इस फसल की विशेषता छिपी नहीं है। यदि किसान उड़द की खेती उन्नत तरीके से करें तो इस फसल से अधिक उत्पादन के साथ अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकता है। इस फसल पर कई कीटों और रोगों का प्रकोप होता है। जिससे फसल की गुणवत्ता और उपज पर प्रतिकूल प्रभाव होता है, इससे बचने के लिए समय रहते इनकी रोकथाम करनी चाहिए। जिससे फसल को कोई नुकसान न हो।

रोग नियंत्रण

  • मोजेक : इस रोग की रोकथाम के लिए माहू का नियंत्रण करना चाहिए। कीटनाशक दायमेथोएट 30 ई.सी. 1.5 मिली अथवा इमिडाक्लोप्रिड 0.3 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोलकर फसल पर छिड़कें। आवश्यकतानुसार 10-12 दिन बाद छिड़काव को दोहरावें।

  • छाछ्या, मेन्कोफ भिन्य ब्लाइट : कार्बोण्डाजिम 1 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर फसल छिड़कें।

  • सरकोस्पोरा पत्ती धब्बा : रोग की प्रारम्भिक अवस्था में 2 ग्राम मेन्कोजेब अथवा 3 ग्राम कॉपर आक्सीक्लोराइड प्रति लीटर की दर से पानी में घोलकर फसल पर छिड़काव करें।

  • एन्थ्रेकनोज : जैसे ही रोग के लक्षण दिखाई दें, तब 2 ग्राम मेन्कोजेब अथवा 3 ग्राम कॉपर आक्सीक्लोराइड प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

  • जीवाणु झुलसा : यदि रोग के अनुकूल मौसम हो तो 1 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन प्रति 10 लीटर पानी की दर से घोल बनाकर फसल पर छिड़कें। आवश्यकतानुसार 10 दिन बाद पुनः दोहरावें।

  • गेरूआ : जैसे ही रोग फसल में दिखाई दें तो 2.5 ग्राम घुलनशील सल्फर अथवा मेन्कोजेब 2 ग्राम प्रतिलीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।

  • पर्णकुंचन : इस रोग के संवाहक थ्रिप्स के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल-0.03 मिली अथवा डाइमेथोएट-30 ईसी 1 मिली प्रतिलीटर पानी की दर से घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें।

कीट नियंत्रण

  • रस चूसक : दायमेथोएट 30 ईसी 1.5 मिली अथवा इमिडाक्लोप्रिड 0.3 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोलकर फसल पर छिड़कें। आवश्यकतानुसार 10-12 दिन बाद छिड़काव को दोहरावें।

  • बिहार हैयरी केटर-पिलर (कातरा) : कातरे का प्रकोप होने पर क्युनालफॉस पाउडर का 20-25 किग्रा प्रति हैक्टेयर फसल पर बुरकाव करना चाहिए।

  • केटर पिलर : इसके नियंत्रण के लिए क्युनालफॉस 25 ईसी 2 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।

  • पिस्सूभृंग, पत्ती मोडक इल्ली : नियंत्रण के लिए क्युनालफॉस 2 मिली पानी की दर से घोल बनाकर फसल पर छिड़कें।


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